कालेटी हत्या प्रकरण...
जालोर. बागोड़ा थाना क्षेत्र के कालेटी गांव में 17 अगस्त की रात को सोसायटी मैनेजर की हत्या के मामले का पुलिस ने 43 दिन की मशक्कत के बाद खुलासा कर दिया। मामले में पुलिस ने 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में नौकरी पाने की चाहत के चलते इस घटनाक्रम को अंजाम दिया गया। मामले के अनुसार कालेटी गांव में 17 अगस्त रात के समय सोसायटी भवन के बाहर सोते हुए सोसायटी मैनेजर सायरखान पुत्र मोतीखान मुसलमान की हत्या हो गई थी। जिस पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। घटनाक्रम के बाद आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रदर्शन भी हुए और लंबी मशक्कत के बाद पुलिस ने विभिन्न आधारों और तथ्यों के आधार पर आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
मास्टरमाइंड है मगाराम
हत्या की वारदात के बाद एसपी विकास शर्मा के निर्देशन में पुलिस दल का गठन किया गया। बागरा, जालोर और सायला पुलिस के संयुक्त दल ने मामले में जांच शुरू करने के साथ साथ संदिग्धों पर नजर रखी। दल ने घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच कर घटना के डेढ़ महीना बाद हत्या की वारदात का राजफाश किया। वारदात का मास्टरमाइंड कालेटी निवासी मगाराम पुत्र कालुराम देवासी है। जबकि सिणधरी निवासी मुकेशसिंह पुत्र रामसिंह रावणा राजपूत, कालेटी निवासी सुरताराम उर्फ सुरेश कुमार पुत्र खसाराम प्रजापत, अशोक कुमार पुत्र भमराजी बंजारा भाट निवासी हरमू, तिलोड़ा निवासी विक्रमसिंह पुत्र भबूतसिंह दहिया राजपूत ने वारदात को अंजाम दिया।
नौकरी पाने की चाहत ने बनाया अपराधी
गिरफ्तार मुख्य साजिशकर्ता मगाराम देवासी ने सायरखान व्यवस्थापक के पास सहायक एवं सेल्समेन के रूप में वर्ष 2010 से 2014 तक कालेटी में सोसायटी में कार्य किया था, लेकिन उसके बाद वह अन्य सोसायटी ग्राम भालनी, बाली में कार्यरत था। 5-6 महीने पहले सोसायटी के सहायक व्यवस्थापक पद पर नियुक्ति के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रिया जारी होने से मगाराम ग्राम कालेटी सोसायटी में सहायक व्यवस्थापक का पद प्राप्त करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी से प्रस्ताव सोसायटी अध्यक्ष से ले लिया और अनुभव प्रमाण पत्र के लिए सायर खां से ऑडिट रिपोर्ट में अपना नाम शामिल करने की मंाग की, लेकिन सायर खां ने उसे ऑडिट रिपोर्ट देने से मना कर दिया। पूछताछ में सामने आया है कि मृतक सायर खां सहायक व्यवस्थापक अपने बेटे को बनवाना चाहता था।
ट्रेप की कार्रवाई की मशक्कत से शक गहराया
मगाराम देवासी ने सायर खां को रास्ते से हटाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत व ट्रेप करवाने का प्रयास किया। इस कार्रवाई के लिए मगाराम ने किसी अन्य व्यक्ति का सहारा लिया, जिसका खुलासा जांच में हुआ। इसके चलते भी मगाराम पर पुलिस को पहले स्तर पर शक हुआ। इधर, ट्रेप की कार्रवाई में असफल रहने पर मगाराम ने अपने मित्र सुरताराम उर्फ सुरेश के साथ मिलकर सायर खां की हत्या की साजिश रची। सुरताराम उर्फ सुरेश ने सिणधरी (बाड़मेर) निवासी अपने मित्र मुकेशसिंह रावणा राजपूत को 10 लाख रूपये में सायर खां की हत्या करवाने की सुपारी दी। जिस पर मगाराम, सुरताराम उर्फ सुरेश, मुकेशसिंह, अशोक बंजारा व विक्रमसिंह ने मिलकर सायर खां की हत्या करने की साजिश रची।
हत्या के लिए पेशगी के 1 लाख दिए
मगाराम व सुरताराम उर्फ सुरेश ने 1 लाख रुपए एडवांस मुकेशसिंह को दिए। घटनास्थल की रैकी करने के बाद 17 अगस्त की रात्रि में अशोक बंजारा व विक्रमसिंह ने सोते हुये सायर खां की चाकू से वार कर हत्या कर दी।
इनका कहना
पुलिस दल के गठन के बाद विभिन्न स्तर पर पड़ताल की गई, जिसके बाद पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
- रामकुमार कस्वां, एएसपी, जालोर





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