Breaking News
recent

11 साल की उम्र में कर ली दसवीं पास : हेवी लाइसेंस के लिए पेश की अंकतालिका फर्जी

राजसमंद. आमजन की सुविधा व पारदर्शिता के लिए परिवहन विभाग का हर कार्य ऑनलाइन करने के बाद दलाली तो कम नहीं हुई और फर्जीवाड़ा कई गुणा बढ़ गया है। ई मित्र केन्द्रों से फर्जी पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र बनाने के बाद अब फर्जी अंकतालिका बनाने का मामला सामने आया है। 11 साल की उम्र में दसवीं उत्तीर्ण होने की अंकतालिका देखकर परिवहन उप निरीक्षक अचंभित रह गए और संदेह पर दसवीं कौनसे स्कूल में पढऩे का सवाल किया, तो आवेदक स्कूल का नाम ही नहीं बता पाया। इस पर उप निरीक्षक ने फर्जी अंकतालिका से हेवी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने पर दलाल, ई मित्र संचालक के साथ आवेदक के विरुद्ध राजनगर थाने में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज करवा दिया। पुलिस के अनुसार परिवहन उप निरीक्षक अनिल चौधरी ने रिपोर्ट दी। बताया कि देवाजी का गुड़ा निवासी सम्पतसिंह चुंडावत पुत्र रामसिंह चुंडावत ने हेवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए परिवहन विभाग में आवेदन प्रस्तुत किया। उप निरीक्षक चौधरी ने दस्तावेजों की जांच के लिए मूल दस्तावेज मांगे। इस पर सम्पतसिंह ने आधार कार्ड व दसवीं बोर्ड की मूल अंकतालिका बताई। उप निरीक्षक ने फोटो प्रति से दस्तावेज मिलान किए, जो सही पाए गए, मगर जन्म वर्ष 198 9 और 10वीं उत्तीर्ण करने का वर्ष 2000 अंकित होने से परिवहन उप निरीक्षक का माथा ठनक गया। आखिर 11 साल की उम्र में 10वीं उत्तीर्ण कैसे कर ली। इस पर उप निरीक्षक आवेदक से कुछ सवाल किए, जिसका संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाया। सख्ती बरतने पर आवेदक द्वारा बताने पर राती तलाई, चारभुजा निवासी दलाल पिन्टूसिंह चौहान को बुला लिया। दलाल पिन्टूसिंह से सख्ती से पूछताछ करने पर रिछेड़ में ई मित्र संचालक चाभुजा निवासी पुनीत सोनी से फर्जी अंकतालिका बनवाना बताया। इस परिवहन उप निरीक्षक की रिपोर्ट पर पुलिस ने प्रकरा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। अब प्रकरण की जांच हैड कांस्टेबल कैलाशचंद्र द्वारा की जा रही है।

यह है चरित्र प्रमाण पत्र बनाने का तरीका
सरकारी नौकरी, किसी विशेष उत्पाद की डीलरशिप, मकान किराए लेना, घरेलू नौकर रखने, हेवी ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, वीजा सहित कई कार्यों के लिए हर व्यक्ति को पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता है। इसके लिए ऑनलाइन ई-मित्र केन्द्रों से आवेदन किए जा रहे हैं। फिर पुलिस द्वारा आवेदक का अपराधिक रिकॉर्ड खंगालने के बाद उसके चरित्र को लेकर गहन जांच की जाती है। उसके बाद भौतिक रिपोर्ट थाना पुलिस द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक को पेश कर दी जाती है, जहां डिजिटल हस्ताक्षर से चरित्र प्रमाण पत्र जारी दिया जाता है। फिर उसी ई-मित्र से पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र की प्रिंट मिलती है, जहां से ऑनलाइन आवेदन किया गया है।

पहले फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र पकड़े
पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र पर ईमित्र केंद्र का नाम या उनके कोड नम्बर अंकित नहीं होने से यह भी पता नहीं चलता कि फर्जी प्रमाण पत्र किसने जारी किया। इसका पता लगाना मुश्किल है। इस तरह की गंभीर गड़बड़ी व अनियमितता परिवहन विभाग ने हेवी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आए आवेदनों की जांच के दौरान पकड़ ली। इस पर तत्कालीन परिवहन अधिकारी नैनसिंह सोढ़ा द्वारा भी जिला पुलिस को अवगत कराया गया था। बताया गया था कि ज्यादातर प्रमाण पत्रों पर अंकित रेफरेंस नम्बरों की जांच करने पर वेब पर कोई ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं है, जबकि कुछ प्रमाण पत्र अन्य लोगों के नाम पर जारी होना सामने आ रहा है। कुछ प्रमाण पत्र पुराने रेफरेंस नम्बरों से बन रहे हैं, तो कुछ बिना नम्बर के जारी किए जा रहे हैं।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.