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आखिर एक माह बाद यहां से 11 बालक हुए शिफ्ट


बीकानेर. राजकीय संप्रेषण एवं बाल सुधारगृह में रह रहे सेफ्टी ऑफ पैलेस के ११ बालकों (विधि से संघर्षरत बालक) को अन्यत्र शिफ्ट करने की स्वीकृति के एक माह बाद रविवार को शिफ्ट करवा दिया गया। रविवार सुबह पुलिस संरक्षण में सभी बालकों को भीलवाड़ा के बाल सुधारगृह के लिए रवाना किया।

 

बाल सुधारगृह अधीक्षक शारदा चौधरी ने बताया कि किशोरगृह में वर्तमान में २५ बालक है। इनमें से प्लेस ऑफ सेफ्टी के ११ बालक, संप्रेषण गृह में आठ और किशोरगृह में छह बालक है। यहां से प्लेस ऑफ सेफ्टी के ११ बालकों को भीलवाड़ा शिफ्ट किया है। रविवार अलसुबह सात बजे केयर टेकर महेश के नेतृत्व में पुलिस सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में ११ बालकों को भीलवाड़ा रवाना किया गया।

 

वारदात के बाद चेता निदेशालय
राजकीय संप्रेषण एवं बाल सुधारगृह भवन के रिनोवेशन एवं नवनिर्माण के चलते सेफ्टी ऑफ पैलेस के बालकों को सुरक्षादृष्टि से अन्यत्र शिफ्ट कराने के प्रस्ताव लंबे समय से बाल अधिकारिता विभाग निदेशालय, जयपुर में अटके थे। इसी बीच संप्रेषण गृह में दो बड़ी वारदात हुई। एक वारदात में विधि से संघर्षरत बालकों में झगड़ा होने से तीन जने गंभीर घायल हुए। एक-डेढ़ महीने बाद ही किशोरगृह से तीन बालक दीवार फांदकर भाग गए। इन वारदातों के बाद निदेशालय ने सुरक्षा की दृष्टि से सेफ्टी ऑफ पैलेस बालकों को यहां से भीलवाड़ा शिफ्ट करने की अनुमति दे दी। शिफ्टिंग की अनुमति मिलने के बाद पुलिस सुरक्षागार्ड नहीं मिलने से बालकों को शिफ्ट नहीं किया जा रहा था। रविवार को पुलिस सुरक्षागार्ड मिलने पर बालकों को भीलवाड़ा शिफ्ट करवा दिया गया। गौरतलब है कि वर्ष-२०१८ से बीकानेर में सेफ्टी ऑफ पैलेस शुरू किया गया था।

 

राजस्थान पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
किशोरगृह में विधि से संघर्षरत बालकों के झगडऩे, दीवार फांदकर भागने की घटना के बाद राजस्थान पत्रिका ने विधि से संघर्षरत (सेफ्टी ऑफ पैलेस) बालकों को अन्यत्र शिफ्ट कराने का मुद्दा उठाया था। इसमें बताया था कि बीकानेर स्तर पर सेफ्टी ऑफ पैलेस के बालकों को अन्यत्र शिफ्ट कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन निदेशालय कोई सुनवाई नहीं कर रहा। बीकानेर के बाल संप्रेषण में दो बड़ी बारदात होने के बाद निदेशालय जागा और शिफ्टिंग की स्वीकृति दी। बालकों को निदेशालय से स्वीकृति के बाद पुलिस सुरक्षा नहीं मिलने से शिफ्ट नहीं किया जा रहा था। ऐसे में एक बार फिर राजस्थान पत्रिका ने शिफ्टिंग की 'स्वीकृति के बाद अब गार्ड का इंतजारÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था।



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