कुपोषण का कलंक, आर्थिक समानता के अभाव में बिगड़ी दशा, जिले में संचालित है 1352 आंगनबाड़ी केन्द्र
दौसा ग्रामीण. आज के बच्चे भविष्य में देश के नवनिर्माण का आधार स्तम्भ है, लेकिन इसके बावजूद जिले में हजारों बच्चे कुपोषित है। खराब आर्थिक स्थिति एवं जागरूकता के अभाव में सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूूद स्थिति जस की जस बनी हुई है। जानकारी के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 1352 आंगनबाड़ी केन्द्र स्थापित है। वर्ष 2017-18 में यहां आने वाले 6 वर्ष तक के करीब 80 हजार बच्चों में से 17 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित चिह्नित किए गए।
इनमें से बांदीकुई में 2470, दौसा में 2006, महुवा में 1883, सिकराय में 1741 एवं लालसोट में सबसे अधिक 9294 कुपोषित पाए गए। हालांकि इन्हें पोषाहार एवं परिजनों को उचित सलाह देकर कुपोषण को काबू में करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन प्रतिवर्ष अन्य बालक चिह्नित हो जाते हैं। ऐसे मेंं बच्चों में कुपोषण मिटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य के झुंझूनूं जिले से 5 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की है।
नहीं मिलता दूध
राज्य सरकार की ओर से प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए दूध वितरण योजना शुरू की गई है, लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चे इससे वंचित है। जबकि नन्हे-मुन्ने बालकों को दूध की आवश्यकता रहती है। इसकी घोषणा के बाद भी अमल नहीं किया गया है।
बच्चों में कुपोषण मिटाने के लिए पोषाहार का वितरण किया जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के टीकाकरण, चिकित्सकीय परामर्श आदि का ध्यान रखा जाता है। इससे काफी हद तक कुपोषण पर नियंत्रण लग सका है।
ओमप्रकाश वशिष्ठ,
उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, दौसा
सिलिकोसिस से मौत
महुवा. थाना इलाके के खेडला गदाली निवासी सिलिकोसिस पीडि़त एक श्रमिक की जयपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। ग्रामीण मुकेशकुमार मीणा ने बताया कि मदनलाल जांगिड़ (52) कई वर्षों से पत्थर नक्कासी का काम करता था। सिलिकोसिस से पीडि़त होने पर काफी लम्बे समय से इलाज चल रहा था। रविवार देर शाम जयपुर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।





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