- चित्रकूट धाम में हुई थी मुरारजी की सभा
- प्रचार के लिए साइकिलो पर जाते थे कार्यकर्ता
भीलवाड़ा।
विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही हर जगह सियासी चर्चा होने लगी है। सब की जुबान में पर अगली सरकार या मुख्यमंत्री कौन होगा के बजाय यह चर्चा जोरों पर है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी फिर से जीतकर आएंगे या नहीं।
इन चर्चा के दौरान ही पुराने शिक्षा विभाग के पास चाय की दुकान चलाने वाले नन्दलाल टेलर से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर 1965 से ही हर चुनाव को देखा है। 1964 में हुए उप चुनाव में शिवचरण माथुर की जीत हुई थी, लेकिन भदादा बाग के वार्ड 16 (पहले 9 था) में जनसंघ को 122 मत अधिक मिले थे। इस बात को लेकर आज भी कांग्रेस के बड़े नेता यह मानते हैं कि इस क्षेत्र से कांग्रेस को बढ़त नहीं मिल सकती। वर्ष 1971 में मेवाड़ घराने के तत्कालीन मुखिया व भैरोसिंह शेखावत भीलवाड़ा आए थे। सबसे बड़ी सभा 1977 में मुरारजी भाई देसाई की चित्रकूटधाम में हुई थी। इस सभा में जगह-जगह ड्रम रखे गए थे। उसमें लोगों ने दिल खोलकर चुनाव के लिए चन्दा दिया था। मुरारजी को देखने के लिए शहर उमड़ पड़ा था। पूरी सभा के दौरान वे मसनद पर बैठे रहे थे। जनसंघ के मदनसिंह दातार (दातारामगढ़) ने भी गोलप्याऊ चौराहे पर सभा ली थी। उनके साथ भैरोसिंह शेखावत भी आए थे।
सबकी बैठक होटल पर थी
नंदलाल ने बताया कि चुनाव प्रचार के लिए कार्यकर्ता साइकिलों पर जाते थे। कपड़े के बैनर बनाते थे। महिलाएं मतदान करने बैलगाडिय़ों पर जाती थी। चुनाव भले ही दो पार्टियों के बीच होते थे, लेकिन कांग्रेस, जनसंघ या हिन्दू महासभा कार्यकर्ता व नेता उनकी चाय की दुकान पर बैठकर रणनीति बनाते थे। रात 12 बजे तक उमाकान्त आचार्य, रमाकान्त, रामचन्द्र जोशी, सुभाष बहेडिय़ा, जगदीशचन्द्र दरक जैसे नेता यहां बैठा करते थे। चुनाव पर चर्चा होती थी। चुनाव प्रचार के लिए चद्र काटकर (स्टेंसिल) दीवारों पर पेटिंग की जाती थी। अब प्रचार का तरीका बदल गया है। सोशल मीडिया पर प्रचार होने लगा है।





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