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अलवर दशहरा 2018 : रावण दहन देखने के लिए उमड़ा पूरा शहर, धूं-धूं कर जला रावण का अहंकार

रावण के गिरते ही पृथ्वी हिल गई। समुद्र, नदियां, दिशाओं के हाथी और पर्वत क्षुब्ध हो उठे। रावण धड़ के दोनों टुकड़ों को फैलाकर भालू और वानरों के समुदाय को दबाता हुआ पृथ्वी पर गिर पड़ा।

श्रीरामरचितमानस की यह पंक्तियां रावण दहन के अलवर में हुए कार्यक्रम पर बिल्कुल खरी उतरती हैं। यहां जैसे ही भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण जी व हनुमान जी के साथ रावण, मेघनाथ और कुम्भकरण का अंत कर दिया। वातावरण में आतिशबाजी गूंज उठी और श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। यह दृश्य जेल चौराहे के समीप स्थित दशहरा मैदान का है।
यहां शाम दिन छिपने से ठीक पहले भगवान श्रीराम ने राम का वध किया। इसी प्रकार मेघनाथ और कुम्भकरण का अंत किया गया। इसके साथ ही वातावरण में आतिशबाजी गूंजने लगी। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजय दशमी पर्व श्रद्धा व धूमधाम से मनाया गया। मुख्य समारोह जिला मुख्यालय पर दशहरा मैदान में हुआ। यहां गाजे बाजे और बैंड बाजों के साथ निकली भगवान श्रीराम की सवारी जब यहां पहुंची तो श्रीराम का जयघोष किया गया।

सोने की लंका को किया तहस नहस

अलवर के दशहरा मैदान में बनी सोने की लंका को हनुमान जी ने तहस नहस कर दिया जिससे
इससे पूर्व यहां बनी सोने की लंका को हनुमान जी ने तहस नहस कर दिया। इसे देख दर्शकों ने जमकर तालिया बजाई। इस बार सोने की लंका पहली बार बनाई गई थी जिसे हजारों दर्शकों ने खूब सराहा।

तीन तीर चलाए और फिर भी नहीं मरा रावण: दशहरा मैदान में भगवान श्रीराम ने तीन बार अग्नि बाण छोड़े। इन अग्निबाणों के लिए राकेट लगाए गए थे जो तीनों ही नहीं चले। ऐसे में भगवान श्रीराम से अनुमति लेकर सीधे ही मैदान में जाकर रावण के पुतले में आग लगा दी गई। इस दृश्य से पहले राकेट नहीं चलने पर लोगों ने जमकर तालियां बजाई।

धर्म से बड़ी नहीं आचार संहिता

रावण दहन कार्यक्रम में विधायक ज्ञानदेव आहूजा मात्र दो मिनट ही बोले। आहूजा ने कहा कि आचार संहिता में धर्म को नहीं रख सकते। धर्म से बड़ी आचार संहिता नहीं है। उन्होंने रावण रूपी बुराइयों के अंत के लिए सभी से आगे आने का आह्वान किया। वे आचार संहिता के चलते पहले के सालों की तरह अधिक नहीं बोले।

आतिशबाजी में लगी आग, मौके पर बुझाई

दशहरा मैदान में एक जगह आतिशबाजी रखी हुई थी जिसमें आग लग गई। इसे मौके पर तत्काल ही बुझा दिया गया जिससे राहत मिली।



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