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2019 से पहले महागठबंधन को पलीता, चार महीने में ही ध्वस्त हो गई विपक्षी एकता

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के जरिए बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का सपना देख रही कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, बुधवार को बीएसपी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधकर ये साबित कर दिया कि वो आने वाले कई राज्यों के चुनावों और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का साथ नहीं देने वाली है। इस तरह बीएसपी के तेवरों को देखकर ये भी साफ हो गया है कि 2019 से पहले जिस महागठबंधन की सुगबुगाहट सियासी गलियारों में नजर आ रही थी वो खत्म हो गई है।

Mayawati And Sonia Gandhi

मायावती ने महागठबंधन की उम्मीदों को लगाया पलीता

ये तस्वीरें ज्यादा पुरानी नहीं है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में ली गई इस तस्वीर के बाद तमाम राजनीतिक पंडितों ने ये कयास लगाने शुरू कर दिए थे कि 2019 के लिए बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन लगभग बनकर तैयार है, क्योंकि मौका ही कुछ ऐसा था। कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में देश के कोने-कोने से विरोधी दलों के नेता इकट्ठा हुए थे। इसी अवसर पर मायावती और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के बीच दिखी गर्मजोशी ने तो सभी को हैरान कर दिया था। सोनिया गांधी ने कई बार मायावती को गले लगाया था और कई बार मीडिया के सामने दोनों ने मिलकर हाथ ऊपर उठाया था।

चार महीने में धव्स्त हुई विपक्षी एकता?

खैर सिर्फ चार महीने के समय में ही महागठबंधन को ऐसा पलीता लगा है कि अब शायद ही 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल बीजेपी के सामने एकजुट हो पाएंगे। बुधवार को बीएसपी प्रमुख मायावती ने राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में बिना कांग्रेस के चुनाव लड़ने का ऐलान करके ये साबित कर दिया कि वो आने वाले चुनावों में और खासकर कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के साथ नहीं रहेगी तो वहीं महागठबंध बिना कांग्रेस के बनना बहुत मुश्किल है। इससे पहले मायावती कर्नाटक विधानसभा चुनाव भी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर लड़ चुकी हैं और इसी फॉर्मूले को आगे भी जारी रखेंग।

मायावती के बाद ये राजनीतिक दल भी कर सकते हैं कांग्रेस से किनारा

माना ये भी जा रही है कि महागठबंधन से पहले कांग्रेस पार्टी की वजह से किनारा करने वालीं बीएसपी पहली पार्टी बनकर नहीं रह जाएगी। अर्थात 2019 का चुनाव आते-आते अन्य राजनीतिक दल भी कांग्रेस से किनारा कर सकते हैं। सबसे पहले तो स्थिति उत्तरप्रदेश की ही रोचक होगी, क्योंकि अगर अखिलेश यादव मायावती के साथ जाने का फैसला करते हैं तो उन्हें कांग्रेस से सारे रिश्ते खत्म करने होंगे और नहीं तो कांग्रेस के साथ जाने के लिए सपा को बीएसपी का साथ छोड़ना होगा। इसके अलावा ममता बनर्जी, टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार की एनसीपी और डीएमके ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों से ये साबित कर दिया है कि वो कांग्रेस से किनारा कर सकती है।

मायावती ने कांग्रेस को बताया घमंडी

बुधवार को मायावती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह दिया कि बीजेपी की ही तरह कांग्रेस की भी मंशा है कि किसी तरह बहुजन समाज पार्टी को खत्म कर दिया जाए, लेकिन हमारी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी की मोहताज नहीं है। माया ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी में बहुत घमंड है और सत्ता से जाने के बाद भी उसका अहंकार खत्म नहीं हुआ है। माया ने कहा कि बीएसपी के समर्थन से सरकार में होने के बावजूद कांग्रेस ने कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर अवकाश देने की हमारी मांग को नहीं माना था और इन्हीं नीतियों के कारण जनता अब कांग्रेस को माफ करने के मूड में नहीं है।



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