जैसलमेर. खाकी का रौब यों तो सबको लुभाता है, लेकिन राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से जैसलमेर मुख्यालय पर रविवार को आयोजित पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) परीक्षा के प्रति अभ्यर्थियों ने अपूर्व ढंग से निहायत कम उत्साह दिखाया। जैसलमेर में स्थापित 15 केंद्रों पर नामांकित 4 हजार अभ्यर्थियों में से दो पारियों में आयोजित यह परीक्षा देने महज 115 अभ्यर्थी पहुंचे। इस तरह से उनकी उपस्थिति केवल 2.87 प्रतिशत रही। जिला प्रशासन की निगरानी में इस परीक्षा के लिए केंद्रों पर पुलिस का व्यापक बंदोबस्त किया गया और अन्य निगरानी व्यवस्था की गई थी। जैसलमेर के सुथार पाड़ा स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय स्थित केंद्र में तो केवल एक अभ्यर्थी ही परीक्षा देने आया।
एक अभ्यर्थी पांच पुलिसकर्मी
जैसलमेर के सुथार पाड़ा स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में महज एक ही अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचा। जबकि यहां 160 अभ्यर्थियों को परीक्षा देनी थी। इस एकमात्र अभ्यर्थी के परीक्षा देने के दौरान 5 पुलिसकर्मी केंद्र पर सुरक्षा के लिए तैनात थे। वहीं आधा दर्जन वीक्षकों की ड्यूटी यहां लगाई गई। यही हाल कमोबेश अन्य केंद्रों में भी नजर आया। मसलन महिला महाविद्यालय में 350 की जगह 3, डाइट में 160 में से 5, पॉलोटेक्निक कॉलेज में 120 में से 7, मोंटेसरी स्कूल में 360 में से 11, सागरमल गोपा राउमावि में 360 में से 13 अभ्यर्थी ही परीक्षा देने के लिए आए।
15 केंद्रों की हुई स्थापना
एसआई परीक्षा के लिए जैसलमेर मुख्यालय पर कुल 15 केंद्र स्थापित किए गए थे। यहां कुल 4 हजार अभ्यर्थियों को परीक्षा देनी थी। हर केंद्र पर करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिहाज से तैनात किया गया था। परीक्षा दो पारियों में ली गई। पहली पारी में सामान्य हिंदी और दूसरी में सामान्य ज्ञान की परीक्षा हुई। जिला कलक्टर इस परीक्षा के लिए समन्वयक थे, वहीं नोडल अधिकारी अतिरिक्त कलक्टर को बनाया गया। प्रशासन ने परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न करवाने के लिए 3 सतर्कता दलों का भी गठन किया। अतिरिक्त कलक्टर वीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि 4000 में से 115 अभ्यर्थी ही परीक्षा देने आए।
..इसलिए कम आए अभ्यर्थी
पुलिस उपनिरीक्षक परीक्षा के लिए 3 फीसदी से भी कम अभ्यर्थियों के पहुंचने के पीछे दो कारणों को बड़ी वजहें माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार आरपीएससी ने नकल व अवांछित तरीकों को हतोत्साहित करने के लिए अभ्यर्थियों को अन्य जिलों में परीक्षा केंद्र आवंटित करने का जो तरीका अपनाया है, उस कारण गंभीर अभ्यर्थी ही परीक्षा देने पहुंचते हैं। इसी तरह से सरकारी नौकरियों के विभिन्न कारणों से लम्बित होने को भी मोहभंग का एक कारण माना जा रहा है।





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