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52 साल पहले बना प्रोजेक्ट, हकीकत में कुछ नहीं

बाड़मेर. बाड़मेर, जालोर व सिरोही जिले के लिए 52 साल पहले बने माही प्रोजेक्ट का सपना किसानों के लिए महज कागजी बनता नजर आ रहा है। वर्ष1966 में राजस्थान व गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते में माही प्रोजेक्ट के तहत अरावली में सुरंग बनाकर पानी पहुंचाने का प्रस्ताव था। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह प्रोजेक्ट महज कागजी बनकर रह गया। राज्य सरकार ने घोषणा पत्र में शामिल कर प्रोजेक्ट की क्रियान्विति करवाने की बात कही थी। लेकिन काम सर्वे तक सीमित रहा। अब आचार संहिता लगने से यह प्रोजेक्ट नई सरकार के आने पर भी आगे बढ़ पाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार अरावली पर्वत में करीब 300 किमी की सुरंग बना माही नदी का पानी माही परियोजना के जरिए जालोर होते हुए बाड़मेर पहुंचाना था। इसके लिए सरकार ने मेगा पेयजल-सिंचाई परियोजना पर करीब 6500 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई। लेकिन मामला अटक गया। वर्तमान राज्य सरकार ने अपने घोषणा पत्र में परियोजना को शामिल कर सर्वे शुरू करवाया। लेकिन आचार संहिता लगने पर अब यह काम अटक गया है। इसमें फिजिबिलिटी सर्वे भी करवाया गया था। जल संसाधन विभाग ने माही प्रोजेक्ट को लेकर कई बार बैठकें आयोजित कर चर्चाएं भी की।

यह था माही प्रोजेक्ट

बांसवाड़ा व जालोर के बीच स्थित अरावली पर्वतमाला की शृंखलाओं में सुरंग बनाकर नहर के जरिए माही नदी का पानी जालोर पहुंचना था। उसके बाद पानी बाड़मेर पहुंच पाता। इससे बाड़मेर जिले के किसानों को बड़ी राहत मिलती। यहां 32 लाख 62 हजार हैक्टेयर जमीन सिंचित होती। इसके लिए तत्कालीन जालोर जिला कलक्टर ने 2015 में सरकार को बाड़मेर-जालोर में माही बांध/नदी का सरप्लस पानी उपलब्ध करवाने का सुझाव दिया था।

वर्षों से इंतजार

1966 में गुजरात व राजस्थान सरकारों के बीच हुए समझौते में 40 टीएमसी पानी की मात्रा निर्धारित की गई थी। प्रोजेक्ट के जरिए माही सागर बांध का पानी डूंगरपुर जिले के टिमुरवा गांव तक पहुंचाना था। कैनाल या सुरंग के माध्यम से माही का पानी सेई में पहुंचाने के साथ जवाई बांध में आसानी से पहुंचाया जा सकता है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

- आंदोलन किए, फिर भी माही सपना
माही परियोजना को लेकर खूब आंदोलन किए। किसान पानी के इंतजार में हैं। सरकार ने घोषणा पत्र में प्रोजेक्ट को शामिल भी किया लेकिन पानी नहीं पहुंचा। सरकार महज सपने दिखा रही है।

- केसरसिंह, अध्यक्ष, किसान यूनियन संघ, सिवाना



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