— पाक विस्थापित करेंगे वोट, लोकतंत्र में एेतबार
इन समस्याओं का हुआ हल
2006 में भारत पाकिस्तान के बीच चली थार एक्सप्रेस
लगातार लगाए जाते हैं नागरिकता के लिए शिविर
पाक विस्थापित शरणार्थियों को मिली है नि:शुल्क जमीन
पाक विस्थापितों के वीजा के लिए किया गया सरलीकरण
बाड़मेर. पाक छोड़कर आए लोग हमारे देश के लोकतंत्र में भी अहम भूमिका अदा करते हैं। साल 1947 से लगातार पाकिस्तान छोड़कर भारत आकर शरणार्थी बस रहे हैं। सीमावर्ती बाड़मेर जिले में करीब एक लाख शरणार्थी आजादी के बाद आ चुके है और भारतीय नागरिकता मिलने की वजह से करीब 80 हजार पाक विस्थापित मतदाता है।
15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान अलग हुए। करीब 63 हजार पाकिस्तानी बॉर्डर के रास्ते बाड़मेर जिले में आ गए। इसके बाद 1965 और 1971 की जंग हुई तो करीब 27 हजार पाकिस्तानियों ने अपना वतन छोड़ दिया और भारत आकर बस गए। इसके बाद 2006 में थार एक्सप्रेस भारत पाकिस्तान के बीच शुरू हुई तो 2800 से अधिक पाकिस्तानी यहां आ गए और वे भारत के नागरिक बने हैं। करीब एक लाख पाकिस्तानी आजादी के बाद से आ रहे है और यह सिलसिला निरंतर जारी है। करीब सात साल तक भारत में रहने और अन्य शर्ते पूर्ण होने पर इनको भारत की नागरिकता दी जा रही है। नागरिकता लेने के बाद ये लोग मतदान का अधिकार भी हासिल कर रहे हैं।
शरणार्थियों के वोट रखते हैं वजूद
शरणार्थियों के वोट वजूद भी रखते हैं। चौहटन में इस वक्त तरूणराय कागा विधायक है जो 1971 के बाद में आए हुए शरणार्थी हैं। यहां 20 हजार के करीब शरणार्थियों के एक मुश्त वोट है। लिहाजा यहां पर शरणार्थियों की समस्याओं को तरजीह दी जाती है।
पाकिस्तान में रहती है चुनावों की चर्चा
दोनों मुल्कों के शरणार्थी और अन्य लोग इतने जुड़े है कि दोनों ओर होने वाले चुनावों की भी चर्चा रहती है। बीते दिनों पाकिस्तान में हुए चुनावों में छोर, छाछरो, खोखरापार, कराची, मिठी सहित अन्य क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे महेश मलाणी, सुनिता पंवार, राणा हमीरसिंह सहित अन्य की स्थिति को लेकर यहां दिलचस्पी रही। तो यहां तरूणराय कागा, अमीनखां, अब्दुल हादी परिवार, मानवेन्द्रसिंह, ***** मोहम्मद ऐसे प्रत्याशी है जिनकी जीत हार के चर्चे पाकिस्तान में भी रहते हैं।
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