अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के पिछले दिनों किए एक फैसले पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के रोक लगाने से दो दिन पहले प्रो. सिंह ने खुद की अनुपस्थिति में कामकाज के लिए डीन कमेटी का गठन कर दिया। ऐसा तब है जबकि विधानसभा में संशोधित हुए विश्वविद्यालय के अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं है।
कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह की नियुक्ति 6 अक्टूबर को हुई थी। आचार संहिता के चलते उन्होंने तत्काल कार्यभार संभाल लिया था। इसके बाद प्रो. सिंह ने 8 से 10 अक्टूबर तक कामकाज किया। इस दौरान उन्होंने खुद की गैर मौजूदगी में सामान्य कामकाज के लिए चार डीन की कमेटी बना डाली।
यानि मालूम था सबकुछ....
जिस तरह कुलपति ने डीन कमेटी बनाने में जल्दबाजी दिखाई, उससे सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकृत जानकारी के मुताबिक राजस्थान हाईकोर्ट ने लक्ष्मीनारायण बैरवा की याचिका पर विश्वविद्यालय को 5 अक्टूबर को ही कुलपति योग्यता संबंधित नियमों को लेकर नोटिस जारी कर दिया था। कुलपति प्रो. सिंह की नियुक्ति और कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय ने नोटिस का जवाब भी भेजा। यह माना जा रहा है कि कुलपति और विश्वविद्यालय को पहले से हाईकोर्ट की कार्रवाई का एहसास हो गया था।
संशोधित एक्ट में नहीं प्रावधान....
विधानसभा में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2017 पारित हो चुका है। अधिनियम की धारा 9 (10) के तहत किसी विश्वविद्यालय के कुलपति पद की कोई स्थाई रिक्ति, मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने, निबंलन के कारण या अन्यथा होने पर उप धारा 9 के अधीन संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव तत्काल कुलाधिपति-राज्यपाल को सूचना भेजेंगे। कुलाधिपति सरकार से परामर्श कर किसी दूसरे विश्वविद्यालय के स्थाई कुलपति को अतिरिक्त दायित्व सौंपेंगे।
क्यों पड़ी कमेटी की जरूरत?
कुलपति प्रो. सिंह के स्थान पर राजभवन ने किसी अन्य विश्वविद्यालय के स्थाई कुलपति को कार्यभार नहीं सौंपा है। यानि साफ है, कि कुलपति प्रो. सिंह पद पर बने हुए हैं। ऐसे में प्रो. सिंह का डीन कमेटी का गठन करना समझ से परे है। हालांकि इस मामले में कार्यवाहक कुलसचिव भागीरथ सोनी ने राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेज दी है।





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