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पांच गुना मुनाफे ने बढ़ाई मारवाड़ में डोडा-चूरा की तस्करी... चार एजेंसियां सक्रिय, पर तस्कर बेखौफ

चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर . विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मादक पदार्थ तस्करी की रोकथाम के लिए तमाम सुरक्षा एजेंसियां चौकस हैं लेकिन पांच गुना मुनाफे के फेर में डोडा चूरा की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। लगातार पकड़े जाने के बावजूद तस्कर इस काले कारोबार में जान जोखिम में डालकर लगे हुए हैं। हालत यह हो गए हैं कि गोगुंदा थाने के आठ में से चार कमरे मालखाना बन गए हैं।

मारवाड़ में डोडा-चूरा की सर्वाधिक डिमाण्ड का केन्द्र सांचौर है। मध्यप्रदेश के पड़ोसी जिलों के अलावा चित्तौडगढ़़ एवं प्रतापगढ़ से डोडा चूरा खरीदकर इसकी खपत वाले जगहों पर पहुंचाने के लिए तस्कर उदयपुर के गोगुंदा-पिण्डवाड़ा का रास्ता महफूज मानते हैं।मादक पदार्थ तस्करी को रोकने के लिए पुलिस के अलावा एसओजी, एटीएस और नारकोटिक्स की टीमें तस्करों के इस रूट पर निगरानी रखे हुए हैं लेकिन पुलिस को छोडकऱ अन्य एजेंसियों को सफलता नहीं मिल रही है। यही वजह है कि गोगुंदा में टोल-नाका होने से पुलिस मुखबिर तंत्र के भरोसे 6 माह में 9 तस्करों को पकड़ कर उनसे 11 वाहन और 1650 किलो ग्राम डोडा चूरा बरामद कर चुकी है जिसका बाजार में मूल्य करोड़ों रुपए है। थाने के 8 में से 4 कमरों में तो डोडा चूरा ही भरा हुआ है जिसके निस्तारण के लिए कोर्ट में 52-ए की कार्रवाई हो रही है, जो चुनाव के बाद ही अमल में आ पाएगी।

एक का पांच कर रहे तस्कर

मारवाड़ के तस्कर डोडा पोस्त के लिए मध्यप्रदेश के नीमच, निम्बाहेड़ा, चित्तौडगढ़़ से 500 से 1000 रुपए किलो ग्राम के भाव डोडा चूरा खरीदते हैं। इसे मारवाड़ में 4 से 5 हजार किलो ग्राम में बेच रहे हैं। इस भारी मुनाफे के फेर में तस्कर हर जोखिम उठाने को तैयार हैं।

रूट पता है लेकिन असरदार कार्रवाई नहीं

मध्यप्रदेश एवं चित्तौडगढ़़ से माल खरीदने के बाद तस्कर देबारी-पिण्डवाड़ा हाइवे पकड़ते हैं और गोगुंदा, सायरा, रणकपुर, पाली होते हुए जोधपुर या जालौर की ओर बढ़ जाते है। इसके अलावा पिण्डवाड़ा से सिरोही होते हुए जालौर, बाड़मेर का रूट पकड़ते हैं। इन रूट पर निगरानी में लगी पुलिस, एटीएस, एसओजी और नारकोटिक्स आदि एजेंसियां तस्करी को रोकने की कारगर कार्रवाई नहीं कर पा रही है। इस रूट पर जिले के डबोक, प्रतापनगर, सुखेर, गोगुंदा, बेकरिया, सायरा थाने सहित कई थाने हैं। मालवा से आने वाले मादक पदार्थ की तस्करी के लिए मंगलवाड़ या कपासन से राजसमंद जिले के ग्रामीण रूट कामलीघाट, दिवेर, देसूरी के रास्ते भी काम में लिए जा रहे हैं।

मारवाड़ में खपता डोडा चूरा

सर्वाधिक मात्रा में डोडा-चूरा सांचौर में खपाया जाता है। इसके अलावा जालौर, रानीवाड़ा, भीनमाल, बाड़मेर, पाली, सिरोही, जोधपुर में भी तस्करों का नेटवर्क बना हुआ है। अब तक पकड़ में आए तस्करों में सर्वाधिक विश्नोई और जाट समाज के हैं।

इनका कहना...

दो माह पूर्व पद संभाला है। अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है लेकिन हम लगे हुए हैं। तस्करी के रूट पर निगरानी रख रहे हैं।
सिंद्धांत शर्मा, एएसपी, एसओजी

गोगुंदा-पिण्डवाड़ा हाइवे पर थाना होने से हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। लगातार तस्कर पकड़ रहे हैं लेकिन पूरी तरह से इन्हें रोक नहीं पाए हैं।

भरत योगी, थानाधिकारी गोगुंदा



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