आज गांधी जयंती है। पूरा देश बापू का याद कर रहा है। देश में ही नहीं विदेशों में भी कई जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादों को संजो कर रखा हुआ है। बापू की ऐसी ही कुछ यादें खत के रूप में अलवर में स्वतंत्रता सेनानी रहे मास्टर भोलानाथ के परिवार ने संजोयी हुई है। बापू ने भले ही यह खत मास्टरजी को लिखे हो लेकिन इनमें संदेश पूरी अलवर की जनता के लिए था।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण पत्र तीन नवम्बर 1940 को अंग्रेज शासन को लेकर लिखा था कि ‘लोग भले ही टूट जाएं लेकिन बलात के वश कभी न जाएं ’ मतलब अंग्रेजों के शासन के बल से टूट सकते हैं लेकिन उनके साथ नहीं जाएं। यह भी कहा कि लोगों में विरोध करने की शक्ति है तो विरोध अवश्य करें। बापू के खत में लिखे यह विचार आज भी अन्याय के खिलाफ लडऩे की प्रेरणा देते है।
पत्रों से जुड़ा रहा अलवर से नाता
गांधीजी कभी अलवर तो आए नहीं लेकिन आजादी से पहले अलवरवासियों को खत लिखकर संदेश जरूर देते रहे हैं। भले ही उनके खत अलवर निवासी मास्टर भोलानाथ के नाम से अलवर पहुंचे हों। लेकिन बापू ने अलवर के लोगों से मिलने की कई बार इच्छा जाहिर की थी। खत के जरिए कहा भी था कि जब मैं दिल्ली लौटूंगा तो अलवर में रुकना चाहूंगा। लेकिन ऐसा कभी हो नहीं सका।
कब-कब लिखे पत्र
गांधीजी ने मास्टर भोलानाथ को 5 जून 1939, 30 मई 1940, 5 जून 1939, पांच जुलाई 1940, दो फरवरी 1945 को पोस्टकार्ड के जरिए अपनी भावनाएं प्रेषित की हैं।
पत्रों में यह भी लिखा
पत्रों की लिखावट ज्यादा अच्छी नहीं है। कुछ पत्रों में उन्होंने लिखा कि शासकों से व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क बनाकर रखो। भले ही विरोध करते रहें। तनिक बाधा नहीं समझे। उनसे मिलकर भी सहायता ले सकते हैं। सभी पत्रों में उन्होंने बहुत कम बात लिखी है। सब अप्रत्यक्ष रूप से। ताकि उनकी भाषा को अंग्रेज अच्छे से नहीं समझ सकें।
बेटों के पास सुरक्षित पत्र
बापू के लिखे पत्र मास्टर भोलानाथ के बेटे हर्षवर्धन सिंह व उनके परिवार के पास आज भी सुरक्षित हैं। हर्षवर्धन का कहना है कि पिताजी लिखने पढऩे का काम करते थे। पिता भोलानाथ ने ही समग्र ग्राम सेवा शिविर सेवाग्राम की पूरी जानकारी एक नोटबुक में लिखी थी। यह नोटबुक आज भी उनके पास है। जिसमें प्रति दिन की कार्य योजना लिखी गई थी।एक-एक पेज का सदुपयोग होता था। खुद गांधीजी ऐसे पेपर को काम लेते थे जो एक तरफ से पहले से काम लिए हुए हैं।
मास्टर भोलानाथ को छह पत्र लिखे
आजादी के समय से पहले के समाचार पत्र स्टेट पीपल के पत्रकार व साहित्यकार अलवर निवासी भोलानाथ से गांधीजी बराबर पत्र व्यवहार करते थे। भोलानाथ के परिवार के पास गांधीजी के लिखे छह पत्र आज भी मौजूद हैं। इनमें से कुछ पत्र दिल्ली के म्यूजियम में भी ले जाए गए हैं।





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