प्रतापगढ़. रोडवेज का सोमवार को 55वां स्थापना दिवस था लेकिन स्थापना दिवस पर भी रोडवेज के चक्के थमे रहे और कर्मचारियों ने हड़ताल पर रहकर स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि सुस्त सरकार की हठधर्मिता के चलते राज्य में पिछले 15 दिनों से रोडवेज की बसें बंद है, लेकिन सरकार की ओर से रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल खत्म करने को लेकर कोई सकारात्मक प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं, जो दुख का विषय है।
1 अक्टूबर 1964 को हुई थी स्थापना
राजस्थान रोडवेज की नींव सिरोही जिले के तत्कालीन महाराज ने 428 बसें राजस्थान सरकार को देकर राज्य परिवहन के नाम से संचालित कर रखी थी। राज्य सरकार की ओर से 1 अक्टूबर 1964 को स्टेट रोडवेज से हटाकर इसे राज्य सरकार का उपक्रम घोषित कर दिया गया।
प्रतापगढ़ रोडवेज डिपो का इतिहास
राजस्थान रोडवेज पहले 31 मार्च 2013 से बांसवाड़ा आगार से संचालित होती थी जिसमें 10 वाहन, 20 कर्मचारी थे। जिले में रोडवेज डिपो की मांग के साथ 5 जुलाई 2015 को केन्द्रीय बस स्टैंड एवं डिपो का उद्घाटन किया गया। जहां धीरे-धीरे वाहनों की संख्या बढ़ती रही और वर्तमान में 46 वाहन, 42 शिड्यूल, 107 कर्मचारी काम कर रहे हंै।
यात्री परेशान, सरकार का नहीं ध्यान
प्रदेश में राजस्थान रोडवेज की बसें नहीं चलने से रोजाना कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन न तो सरकार को इसकी चिंता है और न ही हड़ताली कर्मचारियों को। सरकार और हड़ताल पर गए कर्मचारियों की कश्मकश में आम आदमी फंस गया है और उसे काफी परेशानी उठानी पड रही है। प्रदेश में स्थित रोडवेज बस स्टैंडों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। हडताल के चलते करोड़ो रूपयों का नुकसान हो रहा है। फिर भी राज्य सरकार की ओर से अब तक हड़ताल खत्म करने को लेकर कोई गंभीर प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।
मनाया स्थापना दिवस
प्रतापगढ़ डिपो पर सोमवार को राजस्थान रोडवेज का 55 वां स्थापना दिवस मनाया गया। एटक युनियन सचिव ज्ञानचंद्र बैरवा ने बताया कि राज्य सरकार की हठधर्मिता के चलते इतने वर्ष बाद स्थापना दिवस पर रोडवेज बसें नहीं चल पाई है। सरकार को इस ओर जल्द ध्यान देकर मांगें माननी चाहिए। इस दौरान अनार सिंह, मोहम्मद सलीम, पुष्पेन्द्र, अमर सिंह, कन्हैयालाल, सुरेश यादव, सुल्तान गुर्जर, रामस्वरूप गुुर्जर, गोपाल सैन, रधुवीर सिंह, मदन सिंह, सुरेश, मोहन सहित कई कर्मचारी मौजूद थे।





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