जैसलमेर. शराब तस्कर ट्रकों में शराब की खेप भेजते हैं तो उनकी एसकोर्टिंग में लग्जरी वाहनों का इस्तेमाल कर पुलिस की पड़ताल करते है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि एसकोर्टिंग वाहन ट्रक के आगे-आगे चलकर पुलिस की लोकेशन से ट्रक संचालकों को अवगत करवाते रहते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में इंदिरा गांधी नहर आने के बाद आबादी बढऩे के साथ ही सडक़, बिजली जैसी अन्य मूलभूत सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन ये सुविधाएं चोरों तस्करों की काम को आसान कर रही है। क्षेत्र में दूर-दूर तक पुलिस प्रशासन का नामों निशान तक नहीं हैं। यदि पूरे नहरी क्षेत्र की बात की जाए तो बीकानेर के बज्जू थाना से जैसलमेर के नाचना पुलिस थाने तक लगभग 125 किमी की दूरी तक पुलिस थाना तो दूर पुलिस चौकी तक नहीं हैं। नोख थाना भी अपने थाना क्षेत्र के एक तरफ जोधपुर जिले की सीमा के पास सबसे अंतिम छोर पर स्थित हैं। ऐसे में पंजाब, हरियाणा सहित राजस्थान के सूरतगढ़ व आसपास के क्षेत्र से बाड़मेर के रास्ते गुजरात तक शराब तस्करी के लिए यह क्षेत्र तस्करों के लिए सबसे आसान रास्ता बना हुआ हैं। जानकारों के मुताबित नहरी क्षेत्र के रास्ते बड़ी सं या में टृकों व अन्य साधनों के माध्यम से शराब की तस्करी की जाती हैं। कभी-कभार पुलिस की रात्रि गश्त या नाकेबंदी में शराब की खेप पकड़ी जाती है, लेकिन अधिकतर पुलिस की दूरी व संसाधनों की कमी का फायदा उठाने में कामयाब हो जाते हैं। नहरी क्षेत्र में भी विभिन्न जगहों पर चौकियां स्थापित किया जाना प्रस्तावित हैं, लेकिन पुलिस चौकियों खोले जाने की ओर कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिल रही हैं। ऐसे में शराब तस्करी के अलावा बिजली तार चोरी सहित छोटे बड़े अपराध दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है।
निगरानी में आ रही बाधा
-नहरी क्षेत्र में नोख व नाचना थाना क्षेत्र में एक भी पुलिस चौकी नहीं हैं।
-दोनो ही थानों के क्षेत्र की दूरी सौ किमी से अधिक हैं।
-नोख थाना बीकानेर जैसलमेर सडक़ मार्ग से लगभग 20 किमी अंदर की ओर है।
-नाचना थाना भी इस सडक़ मार्ग से अंदर की ओर नाचना गांव में स्थित है।
-बाकी के क्षेत्र सडक़ मार्गों पर पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं हैं।
- ऐसे में शराब तस्कर विभिन्न मार्गों से होते हुए दोनो थानों से बचकर निकलने में कामयाब हो जाते है।





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