भीलवाड़ा।
संत सत्यानंद महाराज ने कहा कि जिस प्रकार बिजली सत्य है और ट्यूबलाइट व पंखे असत्य है उसी प्रकार परमात्मा सत्य है और जगत असत्य है। असत्य संसार दिखाई देता है लेकिन सत्य परमात्मा दिखाई नहीं देता है। परमात्मा को प्राप्त करने की इंद्रियां अलग होती है और वे अनुभव से दिखाई देते हैं। परमात्मा सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है। श्रीमद् भागवत कथा के अधिकारी सभी नहीं होते हैं। इसके अधिकारी वही होते हैं जिनके अंदर ईष्र्या नहीं होती है। अर्थात जो निर्मतसर है वहीं भागवत के अधिकारी हैं। भागवत का अधिकारी बनने के लिए हमें निर्मतसर बनना होगा जो गहन ध्यान से ही संभव है।
संत सत्यानंद रविवार को शास्त्री नगर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर छात्रावास में चल रही भागवत कथा में राजा परीक्षित प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राजा परीक्षित के बारे में बताते हुए कहा कि राजा परीक्षित के जन्म और कर्म दोनों दिव्य हैं। उन्होंने संसार के दर्शन बाद में किए पहले परमात्मा के दर्शन किए। जगत के दर्शन से पहले उन्होंने मां के गर्भ में ही जगदीश के दर्शन कर लिए। उनकी मां उत्तरा भी परम भाग्यशाली है जिन्होंने अपने गर्भ में भक्त और भगवान दोनों को धारण करने का अवसर मिला। कथा के दौरान संत ने संतन के संग लाग रे तेरी अच्छी बनेगी भजन गाया तो श्रद्धालु झूमने लगे तथा महिलाएं नृत्य करने लगी।





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