हिण्डौनसिटी. जिन्हें पेट काट कर नाजों से पाला था, उम्र ढलने पर सहारा देने की बजाय जिगर के टुकड़ों ने ही दुत्कार दिया। अपनों से लगी दिल की ठेस ने खुद व खुद घर की चौखट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अपनों को संवारने में उम्र खपाने बाद शेष जिंदगी वृद्धाश्रम मेंं बसर कर रहे हंै। हिण्डौनसिटी में अग्रसेन कॉलेज के पास संचालित वृद्धाश्रम में वर्तमान में १८ असहाय महिला-पुरुष खुशनुमा जिंदगी जी रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर सोमवार को राजस्थान पत्रिका की टीम ने वृद्धाश्रम में आवासियों से बात की तो पीड़ा दिल को छू गई। उनका कहना था कि वे बोझिल कदमों से यहां आए, लेकिन परायों में अपनोंं से ज्यादा मिल रहे प्रेम से वापस लौटने की इच्छा नहीं है।
वृद्धाश्रम में आस-पास शहरों असहाय वृद्धजनों के अलावा, आगरा, मथुरा, सागर, दिल्ली सहित अनेक स्थानों के वृद्धजन रहते हैं। जहां सभी लोग घर जैसे माहौल में रहते हैं। सुबह-शाम एक साथ बैठेने परिवार में रहने के दिनों की बात छिड़ती है तो अधिकांश को अपनों से मिला दर्द उभर आता है। सूरौठ थाना क्षेत्र के एक गांव के निवासी वृद्धजन ने बताया कि छह पुत्रों में से दो सरकारी अध्यापक हैं, अन्य का अपना धंधा है, लेकिन बेटे उन्हें घर में नहीं रखते। सवाईमाधोपुर जिले के बौली कस्बा निवासी एक जने ने बताया कि बेटों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। बातचीत में हरियाणा के एक शहर से आई महिला ने बताया कि बेटे-बहू से तंग हो वे वृद्धाश्रम में आसरा लिए हैं। याद आने पर वे बेटों से मिलने घर जाती हैं, असहज माहौल उन्हें फिर से वृद्धाश्रम में आने को विवश कर देता है। वृद्धाश्रम मध्यप्रदेश सागर के ९० वर्षीय वृद्ध व एक वृद्ध दम्पती भी रह रहे है।
सुविधाएं लग्जरी, ताकि तकलीफ न हो-
अपनों के दर्द के मारे वृद्धजनों को वृद्धाश्रम में तकलीफ न हो। इसके लिए वहां घरों से बेहरत सुविधाएं मुहैया कराई हुई है। वृद्धाश्रम के अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रकाश खेडिया ने बताया कि हॉल को दो एसी लगवा की वातानुकूलित बनाया हुआ है। साथ ही मनोरंजन के लिए एलईडी टीवी, म्युजिक सिस्टम भी है। इसके अलावा आरओ का पानी, रेफ्रिजरेटर, सर्दी में गीजर, रूम हीटर की सुविधा है। वहीं सुबह से शाम तक चाय, नश्ता व खाना कर समयबद्ध व्यवस्था है। रसाई के सामने डायनिंग हॉल में सामूहिक भोजन कराया जाता है।
मंदिर और गार्डन की सुविधा-
संरक्षक पुरुषोत्तम गोयल ने बताया कि आवसियों को प्राकृति आवोहवा के लिए वृद्धाश्रम परिसर में ही उद्यान विकतिस किया है। जहां सुबह शाम बैठकर वृद्धजन ताजी हवा ले सके। साथ ही पूजा के लिए मंदिर भी है। जहां वर्षभर में होने वाले दर्जनों बड़े आयोजनों में शहर के लोग भी शिरकत करते हैं।





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