रमेश बिस्सा
बीकानेर. वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव बीकानेर में रोचक रहे हैं। राजनीति में रुचि रखने वालों को आज भी वह दिन याद है। उस दौर में जनता पार्टी का बोलबाला था, तब हालात यह बने कि कांग्रेस के टिकट पर लडऩे के लिए कोई प्रत्याशी आगे नहीं आ रहा था। उस समय कांग्रेस के सामने प्रत्याशी का संकट था। ऐसे में कांग्रेस से ही निष्कासित गोकुल प्रसाद पुरोहित को बुलाकार फिर से टिकट दिया। वो ना-नुकर करते रहे, लेकिन उस समय टिकट वितरण के प्रभारी चंदलमल वैद ने पुरोहित से मुलाकत की और सीधा चुनाव मैदान में उरने की बात कही।
हलांकि शहरी क्षेत्र में पुष्करणा जाति का बाहुल्य था, इसके बावजूद उस चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय के 'महबूब अली' पुरोहित से चुनाव जीतकर विधायक बन गए। महबूब अली जनता पार्टी से उम्मीदवार थे। गौरतबल है कि गोकुल प्रसाद 1967 से १९७२ तक बीकानेर में कांग्रेस के विधायक रहे। वहीं 1962 से १९67 तक भीलवाड़ा में भी विधायक रह चुके थे, लेकिन 1977 में देश में जनता पार्टी की लहर थी। तब बीकानेर में कांग्रेस को हार सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि उस समय कांग्रेस के टिकट पर कोई चुनाव लडऩे को ही तैयार नहीं हो रहा था।
गुरु आप ही कांग्रेस!
उस चुनाव के साक्षी और सक्रिय कार्यकर्ता प्रेमरतन जोशी (पट्टू सा) बताते हैं कि जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व प्रभारी चंदनमल वैद बीकानेर आए तो उन्होंने गोकुल प्रसाद से वार्ता कर चुनाव लडऩे को कहा। तब पुरोहित ने कहा कि वो तो वर्तमान में पार्टी से निष्कासित है, तब वैद ने खास अंदाज में कहा 'गुरु आप चुनाव लड़ रहे है..आप कांग्रेस हैं।'





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