जैसलमेर. कलात्मक बंगलियों व प्राकृतिक माहौल के बीच शांति व सुकून के पल बिताने के लिए स्वर्णनगरी के सर्वाधिक पंसदीदा स्थलों में से गड़ीसर तालाब इन दिनों एक सप्ताह में दो मासूमों की जिंंदगी लील जाने के कारण सुर्खियों में हैं। गत 5 अक्टूबर को एक छात्रा और उसके बाद लापता हुए किशोर का मंगलवार को तालाब में तैरता हुआ शव मिलने की दु:खद घटनाएं हर किसी को विचलित करने वाली है। अब यह आशंका गहराने लगी है कि शांति व सुकून वाला गड़ीसर सरोवर, जो प्राकृतिक माहौल में घंटे यहां बिताने पर मजबूर कर देता है, वह मासूम जिन्दगियां लील रहा है। हालांकि इस बार अच्छी बारिश नहीं होने से गड़ीसर तालाब पानी से लबालब नहीं हो पाया और न ही सरोवर का पानी टीलों की प्रोल के बाहर ही छलक रहा है। बावजूद इसके तालाब का सौन्दर्य व आकर्षण आज भी सात समंदर पार से आने वाले सैलानियों को रिझा रहा है। हकीकत यह भी है कि यहां किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से डूबकर जान गंवाने के कई हादसे घटित हो चुके हैं। विगत वर्षों के दौरान कम से कम 30 जनों ने जिनमें अधिकांश किशोर व युवा थे, की जिंदगी गड़ीसर के पानी की भेंट चढ़ गई। इसके बावजूद नगरपरिषद द्वारा यहां न तो चौकीदार की पु ता व्यवस्था की गई है और न ही प्रशिक्षित तैराक तैनात नियुक्त किया गया है।
...और हो गई कर्तव्य की इतिश्री
तालाब के प्रवेश द्वार के पास बोर्ड अवश्य लगाया हुआ है, जिसमें चेतावनी के स्वर में लिखा है कि, ‘यहां तैरना, नहाना व कपड़े धोना स त मना है’। नगरपरिषद की ओर से लगाए गए इस बोर्ड की चेतावनी को कोई तवज्जो नहीं देता और कई लोग यहां तैरते या नहाते देखे जा सकते हैं। विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के तौर पर याति अर्जित कर चुके गड़ीसर तालाब में नगरपरिषद की ओर से तालाब के पानी को साफ रखने के लिए कपड़े धोने व नहाने को लेकर प्रतिबंध है, लेकिन खुलेआम नियमों की कमर टूटती देखी जा सकती है।
हादसों की हकीकत यह भी
-गड़ीसर तालाब के समीप कोई गार्ड ही नियुक्त नहीं है।
-तालाब में कहीं इसकी गहराई दो फीट है, कहीं पांच फीट तो कहीं बीस फीट तक।
-दुर्भाग्यवश तैराक पानी की गहराई की जानकारी नहीं होने से फंस जाता है और उसकी मौत हो जाती है।
- गड़ीसर सरोवर में रैलिंग व जंजीरें नहीं लगी है और नहाने पर ाी इसके रोक नहीं है।
- सरोवर के समीप सीसीटीवी कैमरों की निगारानी नहीं है। ऐसे में मासूमों के शव सरोवर बाहर आने पर ही हादसे की जानकारी हो पाती है।
-अमूमन देखा जा सकता है कि बार सैलानी लाइफ सेविंग जैकेट पहने बिना ही नौकायन करने निकल जाते हैं, जो निश्चित ही उनके लिए जोखिमपूर्ण है।
-सरोवर में सुरक्षा के लिहाज से कोई मोटर बोट भी नहीं है।
फैक्ट फाइल
-9 वर्ष पहले बनी थी गड़ीसर को नहर से जोडऩे की योजना।
-1993 में गड़ीसर तालाब को वर्ष भर पानी से भरा रखने के लिए जिला प्रशासन ने बनाई थी योजना।
-12 नौकाएं व बोट उपलब्ध है गड़ीसर में नौकायन के लिए।
- 30 के करीब मौत हो चुकी है अब तक विगत छह वर्षों में ।
-2 मासूम काल कवलित हो चुके हैं तालाब में गत दिनों





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