श्रीगंगानगर.
जिला प्रमुख और सीइओ में आपसी खींचतान के चलते 598 तृतीय श्रेणी शिक्षकों का पदस्थापन अटक गया है। श्रीगंगानगर को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में रीट में चयनित अभ्यथिज़्यों को नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
सीईओ चिमन्यी गोपाल को पिछले तीन दिन से जयपुर में उच्च स्तरीय बैठकों में व्यस्त बताया जा रहा है। इसके विपरीत जिला प्रमुख प्रियंका श्योराण ने सीईओ पर हठधमिज़्ता का आरोप लगाया है।
जिला प्रमुख ने कहा कि वह रबर की मोहर नहीं है। शिक्षक भतीज़् की प्रक्रिया पूरी करवाकर उस पर अंतिम मोहर लगाने के लिए जिला स्टेडिंग कमेटी की बैठक में सिफज़् अनुमोदन करवा दिया जाता है। यह अधिकारियों की मनमानी है।
चयनित अभ्यथीज़् इच्छित ब्लॉक क्षेत्र में नियुक्तियों के लिए उनके पास आकर मिन्नतें निकाल रहे हैं। चयनित अभ्यथिज़्यों को सूची का इंतजार है लेकिन मीटिंग नहीं होने के कारण उनकी नियुक्ति अटक गई है।
ऐसे तो नहीं मिल पाएगी नौकरी
जिला परिषद प्रशासन ने चयनित अभ्यथिज़्यों के दस्तावेज जांच करने की प्रक्रिया अपनाई। नियुक्तियों के लिए पद भी दशाज़्ए लेकिन अधिकारियों ने चयनितों की इच्छा के बजाय खुद ही ऑनलाइन की प्रक्रिया का हवाला देते हुए दूर दराज के स्कूलों में पदस्थापित करने की सूची तैयार कर दी। यह सूची जैसे ही जिला प्रमुख को मिली तो उन्होंने स्टेंडिंग कमेटी की मीटिंग की प्रक्रिया अपनाने से पहले एक-एक सीट का हिसाब मांग लिया।
इस बीच सीईओ जयपुर बैठक में शामिल होने चली गई, वहां डीईओ प्रारंभिक हरचंद गोस्वामी को भी बुला लिया। अंगे्रजी विषय के 320, हिन्दी के 178, एसएसटी के 86,संस्कृत के तीन और विशेष योग्यता के 11 पदों सहित कुल 598 चयनित अभ्यथिज़्यों का पदस्थापन अटक गया है।
सीइओ की वजह से नहीं हो रही स्टेंडिंग कमेटी की बैठक
यह सही है कि सीईओ की वजह से पिछले तीन दिनों से स्टेडिंग कमेटी की मीटिंग नहीं हो रही। अब सोमवार को हाईकोटज़् में हो रही सुनवाई के कारण चयनित 598 अभ्यथिज़्यों का भविष्य दांव पर लग सकता है। इस संबंध में राज्य के प्रमुख शासन सचिव तक शिकायत सीइओ की शिकायत की जा चुकी है।
प्रियंका श्योराण, जिला प्रमुख





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