भीलवाड़ा।
शान्तिभवन में धर्मसभा में सौभाग्य मुनि ने कहा कि शरीर व नाम लोकप्रिय नहीं बना सकता है। मानव का काम उसे लोकप्रिय बनाता है। जिए तो लोकप्रिय बनकर जिए। तब ही जीवन सार्थक है। आजकल मनुष्य अपने परिवार में लोकप्रिय नहीं है तो समाज व देश में कैसे हो सकता है। खाना, पहनना, चलना तथा बिजनस में भी कला होनी चाहिए। कला नहीं है तो इसमें भी मानव पीछे रह जाएगा। भक्ति हम किसी भी महापुरुष की करे असल में उनके गुणों की भक्ति है। महापुरुषों मे गुण पाए जाते है तब ही तो हम पूजनीय व गुण गाए जाते हैं। मानव का नाम महावीर हो सकता है पर महावीर जितने गुण भी होने चाहिए। लोकप्रिय बनने के लिए आध्यात्मिक होना भी जरूरी है। आजकल लोकप्रियता सस्ती हो गई है धन, मकान, वैभव लोकप्रिय नहीं बन सकते है। वो साधन हो सकते है। लोकप्रिय नहीं।
मदनमुनि ने कहा कि मानव भव को सार्थक बनाने के लिए आत्म साधना कि आवश्यकता है। आत्म साधना के बिना जीवन की सार्थकता नहीं है। उपप्रवर्तनी विजयप्रभा ने भी सम्बोधित किया। शांतिभवन के मंत्री नवरतनमल संचेती ने बताया कि आज पक्खी होने पर आयंबिल, उपवास व्रत के महिलाओ और पुरूषो ने पच्खाण लिए। शाम को ६५७ जनों ने एक साथ प्रतिकमण किया।





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