सीकर/श्रीमाधोपुर. हांसपुर के बीजावाली ढाणी निवासी महेश कुमार मिठारवाल 19 अक्टूबर को द्रास सेक्टर में भूस्खलन होने से शहीद हो गया। सैनिक कल्याण अधिकारी नीमकाथाना सुरेन्द्रसिंह के अनुसार शहीद का शव आज सुबह लेह से दिल्ली पहुंचा। जहां बेस अस्पताल में गार्ड ऑफ ऑनर के बाद शहीद का पार्थिव देह श्रीमाधोपुर के लिए रवाना कर दिया गया है। शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार सोमवार सुबह उनके पैतृक गांव ढाणी बीजावाली में किया जाएगा। शहीद महेश की पार्थिव देह रास्ते में जगह जगह पुष्पवर्षा के बीच शाम तक श्रीमाधोपुर पहुंचेगा। इससे पहले जवान के शहीद की खबर सबसे पहले उसके ससुराल पहुंची थी। क्योंकि शहादत की खबर परिजनों को देनी जरूरी था। महेश की डायरी में दो नंबर लिखे थे, एक चाचा का और दूसरा पत्नी का। आर्मी वालों ने पहले चाचा के फोन पर फोन किया, लेकिन चाचा जीणमाता में थे। वे फोन नहीं उठा पाए। बाद में पत्नी के मोबाइल पर सूचना दी, जो मायके रॉयल गई हुई थी। शनिवार को उसी के मोबाइल पर आर्मी से फोन आया था। कहा गया कि किसी पुरुष परिजन से बात करा दो, भाई से बात करवाई, तो छोटा भाई सुनते ही रो पड़ा। सुमन भी पहले तो समझ नहीं पाई, लेकिन भाई की आंखों में बहते आंसुओं ने सब कुछ बिना कहे ही कह दिया। वह शनिवार रात को ही ससुराल आने की जिद कर रही थी, लेकिन परिजनों ने समझाकर रोका। अभी शव आने में ही काफी वक्त लगेगा। इधर, शनिवार को हांसपुर का माहौल भी गमगीन बना
नजर आया।
बचपन से ही सेना में जाने की चाह
शहीद महेश शुरू से ही सेना की तैयारी कर रहा था। दो-तीन साल पहले सीकर में हुई सेना भर्ती रैली में ही उसका चयन हुआ था। प्रशिक्षण के बाद द्रास में उसे नियुक्ति मिली थी। महेश कुमार मिठारवाल तीन साल पहले 6 राज आरआइएफ बटालियन में भर्ती हुआ था। करीब बीस माह पूर्व महेश की रॉयल निवासी सुमन के साथ शादी हुई थी।
यह है शहीद का परिवार
शहीद महेश कुमार के परिवार में उसकी पत्नी सुमन के अलावा एक सात माह की मासूम बेटी है। महेश के पिता गिरधारीलाल टैम्पो चलाते हैं। बडा भाई राजेश कुमार निजी कंपनी में काम करता है वहीं एक बहन की शादी हो चुकी हैं।





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