सीकर. चुनावी रण में उतरे दावेदार अपने-अपने दावों को लेकर मैदान में कूद गए है। कोई संगठन के अनुभव तो कोई आरएसएस के प्रशिक्षण शिविर के दम पर टिकट मांग रहा है। भाजपा, कांग्रेस, बसपा, माकपा और दीनदयाल वाहिनी, आप सहित अन्य दलों में ताल ठोकने वाले दावेदार कुछ इस तरह के तर्को के जरिए बायोडाटा भी पार्टियों को भिजवा रहे है। कई विधानसभा क्षेत्रों में दावेदारों की अधिकता के कारण हॉट सीट भी बन गई है।
पिछले चुनाव के मामले बढ़ी
महिला दावेदार
जिले में पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले महिला दावेदारों की संख्या बढ़ी है। पिछले चुनाव में सीकर जिले की आठों विधानसभा सीटों पर १५ महिला ही दावेदार ही थी। लेकिन इस चुनाव में महिला दावेदारों की संख्या ६५ को पार कर गई है।
टिकट से पहले प्रचार
पार्टियों ने भले ही अभी टिकट वितरण की कवायद शुरू नहीं की हो लेकिनि कई दावेदारों ने जनसम्पर्क अभियानों के जरिए प्रचार शुरू कर दिया है। कई दावेदार आलाकमान से संकेत मिलने तो कई स्तर पर ही माहौल बनाने में लगे है।
इन आधारों पर मांगी जा रही है टिकट
अनुभव: ज्यादातर दावेदारों ने टिकट के लिए अनुभव को जरिया बनाया है। दावेदारों का कहना है कि संगठन के साथ पिछले कई चुनावों में उन्होंने प्रचार की कमान खुद संभाली थी। वहीं कुछ महिला दावेदार संगठन में सभाली जिम्मेदारी को गिनाते हुए टिकट की मांग कर रही है।
युवा: जिन विधानसभा क्षेत्रों में लंबे अर्से से जीतने वाले दिग्गज है उनके सामने भी कई युवाओं ने ताल ठोकी है। पार्टियों के युवाओं के आगे बढ़ाने के नारे के तहत वह टिकट मांग रहे है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में सीकर जिले में दो युवाओं को टिकट मिली थी।





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