Breaking News
recent

राजस्थान का रण - सवा फीसदी वोट इधर से उधर होने पर ही बदल जाती है सरकार

जयपुर.

विधानसभा चुनावों में महज सवा से पांच फीसदी वोटों के स्विंग से प्रदेश में सरकारें बदलती रही है। वहीं स्विंग छह फीसदी या इससे अधिक है तो पार्टी की लहर बहती दिखी है।प्रदेश में वोटों का सबसे अधिक स्विंग आपातकाल के बाद 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जब कांग्रेस की झोली से करीब 19.64 फीसदी वोट छिटक गए और हर तरफ जनता पार्टी की लहर में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था।
चुनाव में एक-एक वोट की कीमत होती है। कांग्रेस के सी.पी.जोशी ने 2008 का चुनाव महज एक वोट से हारा था। उनकी सीएम की दावेदारी चली गई थी। दल इसको भली-भांति जानते हैं, जिसकी वजह से वह चुनाव में पूरी ताकत झोंक देते हैं। 1993 व 2008 के चुनाव बड़े उदाहरण हैं। 1993 में भाजपा का वोट कांग्रेस से महज 0.33 फीसदी अधिक था, पर सीटों में अंतर 19 तक पहुंच गया। ऐसे में कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा। वहीं 2008 में सवा फीसदी वोटों का स्विंग कांग्रेस के पक्ष में रहा तो उसे सत्ता की चाबी हाथ लग गई।

ऐसे बन गई लहर
1967 के विस चुनाव में कांग्रेस को 41.42 फीसदी वोट के साथ 80 सीटें मिली। 1972 के चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में 9.71 फीसदी स्विंग हुआ तो कांग्रेस ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। कांग्रेस ने 51.13 फीसदी वोट हासिल कर 179 में से 145 सीटें जीती ली थीं।
1977 में कांग्रेस औंधे मुंह आ गिरी। उसके 19.64 फीसदी वोट जनता पार्टी में खिसक गए। कांग्रेस की 104 सीटें कम हो गई और जनता पार्टी को 50.39 फीसदी वोट व 152 सीटें मिलीं। कारण आपातकाल रहा।

1980 में चुनाव में कांग्रेस ने 11.47 फीसदी वोट बढ़ाकर सत्ता हासिल की। कांग्रेस को 42.96 वोट व 133 सीटें मिली। जनता पार्टी टूट गई, जनसंघ नेताओं ने भाजपा बना ली। भाजपा को 18.60 वोट व 32 सीटें मिली। जनता पार्टी के तीन धड़ों ने चुनाव लड़ा और 15 सीटें मिली, जबकि वोट करीब 17 फीसदी मिले।

1990 में राम मंदिर मुद्दा गरमाया, कांग्रेस को 1985 में 46.57 फीसदी वोट के साथ 113 सीटें मिलीं। 1990 में कांग्रेस के वोट करीब 12.93 फीसदी कम हुए व सीटें 50 रह गई। भाजपा व जनता दल ने मिलकर चुनाव लड़ा। भाजपा का वोट 4.01 फीसदी बढ़ा, जबकि 46 सीटों का इजाफा हो गया। वहीं जनता दल ने 21.58 फीसदी वोट लेकर 55 सीटें जीत ली।

1993 के चुनाव में महज 0.33 फीसदी वोट के अंतर से कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले 19 सीटें कम मिली। कांग्रेस के कई नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिससे कांग्रेस का गणित बिगड़ गया। चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 1990 के मुकाबले करीब 4.01 फीसदी अधिक रहा, लेकिन सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। भाजपा का मत प्रतिशत करीब 12 फीसदी से अधिक बढ़ा, लेकिन सीटें सिर्फ 10 ही बढ़ सकी।

1998 में करीब 6.68 फीसदी वोटों के स्विंग ने लहर बनाई व कांग्रेस ने 153 सीटें जीत ली। भाजपा के 5.23 वोट खिसक गए, उसे 62 सीटों का नुकसान हुआ।

2003 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर करीब 9 फीसदी वोट खो दिए और सीटें सिर्फ 56 रह गई। भाजपा के पक्ष में 5.97 फीसदी वोट गिरा तो उसे 120 सीटें हासिल हुई।

2008 में कांग्रेस के पक्ष में 1.26 फीसदी अधिक वोट पड़ा, सीटें 56 से 96 हो गईं। इस चुनाव में सबसे अधिक स्विंग 3.97 फीसदी बसपा के पक्ष में हुआ, लेकिन वह 6 सीटें ही जीत सकी थी भाजपा से 4.93 फीसदी वोट निकल गंए, वह 120 से 78 सीट पर आ गई।

2013 में कांग्रेस का वोट करीब 3.75 फीसदी कम हुआ, पर 75 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस को सिर्फ 21 सीटें मिली। वहीं भाजपा के 10.93 फीसदी वोट का स्विंग देखने को मिला, जिससे उसके पक्ष में लहर बन गई। भाजपा ने रिकॉर्ड 163 सीटें जीत ली।

कब किसको कितने वोट और सीट
कांग्रेस ----------------------------------------भाजपा
वर्ष---------वोट--------------सीटे----------वोट---------सीटे
1977-----31.49%--------41---------50.39%*-----152*
1980----42.96% --------133 --------18.60%-----32
1985-----46.57%---------113 ---------21.24% ------38
1990-----33.64%---------50 ----------25.25%-----85
1993-----38.27%---------76 -----------38.60% -----95
1998-----44.95% -------153 ---------33.23% -----33
2003-----35.56% --------56 -----------39.20% -----120
2008-----36.82% --------96 -----------34.27% -----78
2013-----33.07% -----21 -----------45.17% -----163

1967 में स्वतंत्र पार्टी को 22 फीसदी वोट के साथ 48 सीटें और 1990 में जनता दल को 21.58 फीसदी वोट और 55 सीटें मिले थे



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.