Breaking News
recent

जीवन में खुशियां बांटे

सीकर. चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर देवीपुरा में मुनि विश्रान्त सागर महाराज के सानिध्य में गुरुवार को अभिषेक व शांतिधारा की गई। इस दौरान मुनि ने कहा कि सबसे बड़ी सेवा है जीवन की खुशियों को दूसरों को बांटना। जो मनुष्य खुशी देता है उसे खुशी मिलती है। कभी भी किसी के दुख का कारण आप मत बनो अन्यथा जीवन में दुख ही मिलेगा। क्योंकि इज्जत मांगने से नहीं मिलती, धारण करनी पड़ती है।

इज्जत वह वस्त्र है जो चरित्र के साथ संबंध रखती है। कभी भी माता-पिता से असत्य मत बोलो क्योंकि असत्य आधार पर बनाए गए रिश्ते उसी तरह है जिस तरह मिट्टी की रेत का भवन। मां बाप का कर्ज कोई उतार नहीं सकता। विदेशी संस्कृति ने मां का आंचल भी छीन लिया। मां जब अपने बेटे को आंचल के अंदर ढककर स्तनपान कराती थी तो संतान का हृदय कठोर व मजबूत होता था, परंतु आज संतान अपने मां बाप से दूर होते जा रहे हैं।

अपनी मां का दूध का फर्ज भी भूल जाते हैं। क्योंकि मां भी भारतीय संस्कृति भूलती जा रही है। कभी भी मनुष्य को दूसरे को परिवर्तन करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। खुद को ही बदल लेना चाहिए, सामने वाला अपने आप परिवर्तित हो जाएगा। महावीर प्रसाद लालास वाले ने बताया जैन वीर संगठन की ओर से दश लक्षण व्रत करने वालों का सम्मान किया गया। प्रमोद छाबड़ा का भी सम्मान किया गया। छाबड़ा ने अपनी एक किडनी अपनी भाभी को दी है। इस दौरान देवीपुरा कमेठी और सकल दिगंबर जैन समाज उपस्थित था।


प्रियंक जैन ने बताया कि मुनि विश्रान्त सागर के सानिध्य में 28 सितंबर को सुबह सवा सात बजे आदिनाथ दिगम्बर जैन चैत्यालय, तबेला रोड(सीकर) में क्षमावाणी के कलशाभिषेक होंगे। विनोद जयपुरिया ने बताया कि सुबह आठ बजे मुनि के सानिध्य में जैन स्कूल में क्षमावाणी समारोह मनाया जायगा। तरुण क्रांति गुरु परिवार के मंत्री विनोद सेठी ने बताया 28 सितंबर को राष्ट्रसंत क्रांतिकारी मुनि तरुण सागर द्वारा लिखे गए कड़वे प्रवचन के दसवें भाग का विमोचन मुनि विश्रांत सागर के सानिध्य में जैन स्कूल में होगा।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.