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रहस्यमयी गांव कुलधरा में होगा कुछ ऐसा,आप भी रह जाएंगे अंचभित

पोकरण (जैसलमेर). अखिल भारतीय पालीवाल ब्राह्मण समाज संस्थान के राष्ट्रीय सचिव ऋषिदत्त पालीवाल, राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य व समाज की देशभर में बिखरी ऐतिहासिक धरोहरों की सर्वे कर जानकारी हासिल कर रहे सेवानिवृत मैजर रामलाल पालीवाल, समाज के इतिहासकार मोहनलाल पालीवाल व सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत पालीवाल ने रविवार को पोकरण क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर ऐतिहासिक विरासतों का अवलोकन किया। राष्ट्रीय सचिव पालीवाल व कार्यसमिति सदस्य मैजर पालीवाल रविवार को सुबह पोकरण पहुंचे। उन्होंने डिडाणिया गांव में स्थित पुरानी नाडी की आगोर में पालीवाल समाज की ओर से करीब 825 वर्ष पुराने और एकां गांव के पास ढूंढाली नाडी की आगोर में लगे 745 वर्ष पुराने शिलालेख, कीर्तिस्तम्भों का अवलोकन किया। इसी प्रकार उन्होंने एकां गांव के पास उग्रास व ढढू गांव के पुराने तालाबों व श्मशान भूमि पर स्थित छतरियों, उनमें लगी देवलियों, सैंकड़ों वर्ष पुरानी कलात्मक बावडिय़ों व कुंओं का अवलोकन कर उनके बारे में जानकारियां ली।
संग्रहालय में सहेजी जाएगी धरोहरें
पालीवाल ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय सचिव ऋषिदत्त ने बताया कि आगामी दिसम्बर माह में नागपुर महाराष्ट्र में समाज का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में समाज के जगह-जगह बिखरे पड़े इतिहास, पौराणिक दस्तावेज एवं जगह-जगह बिखरे पड़े ऐसे शिलालेख, कीर्ति स्तम्भों की जानकारी जुटाई जा रही है। जिन पर पालीवाल समाज के इतिहास से संबंधित जानकारी लिखी हुई है, जो समाज के गौरवमयी इतिहास की पुष्टि करती है। इन समस्त जानकारियों को राष्ट्रीय सम्मेलन में रखा जाएगा तथा आगामी दिनों में जैसलमेर के कुलधरा में एक विशाल संग्रहालय का निर्माण करवाया जाएगा। जिसमें जिले में जगह-जगह बिखरे पड़े शिलालेख, कलात्मक कीर्तिस्तम्भों व इतिहास से संबंधित सैंकड़ों वर्ष पुराने लिखित दस्तावेजों को रखा जाएगा, ताकि आने वाली भावीपीढी एक जगह पर ऐतिहासिक जानकारियां हासिल कर सके। उन्होंने बताया कि पालीवाल ब्राह्मण समाज की ओर से संवत् 1348 में पाली व 1882 में जैसलमेर से पलायन किया गया। उससे भी 100 वर्ष पुराने शिलालेख पोकरण क्षेत्र में मिले है। उन्होंने बताया कि डिडाणिया गांव में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुथारों की बेरी के पीछे स्थित एक नाडी के पास संवत् 1249 व एकां गांव की ढूंढाली नाडी में संवत् 1329 के शिलालेख व कीर्तिस्तम्भ मिले है। जिन्हें संरक्षित करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।
मारवाड़ में होता था बेहतर जलप्रबंधन
राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य मेजर पालीवाल ने बताया कि आज सरकारें जल संरक्षण को लेकर जल स्वावलम्बन योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन मारवाड़ क्षेत्र के जल प्रबंधन का आज भी कोई सानी नहीं है। उन्होंने बताया कि मारवाड़ विशेषकर जोधपुर, जैसलमेर व बाड़मेर क्षेत्र में मरुस्थल होने के कारण यहां अधिकांशत: अकाल पड़ते थे। यह क्षेत्र पशुपालन के लिए जाना जाता था। ऐसे में व्यक्ति को अपने व पशुओं के लिए जल संरक्षण की महत्ती आवश्यकता होती थी। इसी को लेकर यहां प्रत्येक गांव में कई कुंए, बावडिय़ां व विशाल तालाब बने हुए है। जिनमें बारिश का जल संरक्षण किया जाता था तथा भू-गर्भ के पानी का भी उपयोग लिया जाता था। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में स्थित कलात्मक कुंए, बावडिय़ां व तालाब आज भी सैंकड़ों वर्ष पूर्व उस बेहतर जल प्रबंधन के गवाह है। उन्होंने आने वाले वर्षों में पानी की कमी की आशंका व जल राशि को बचाने के लिए परंपरागत पेयजल स्त्रोतों के रख रखाव को लेकर योजना बनानी चाहिए।



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