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हाइवे का क्षेत्र और कछुए सी रेंगती जिन्दगी

प्रमोद भटनागर
कहने को तो भीम-देवगढ़ विधानसभा क्षेत्र बरसों से हाइवे का क्षेत्र है, जिससे लगता है कि यहां के लोगों की जिन्दगी रफ्तारमय होगी, लेकिन वास्तविकता देखी जाए तो यहां जिन्दगी कछुए सी रेंगती दिखलाई पड़ती है। विकास की बात करें तो गांवों में आज भी लोग सुविधाओं को तरस रहे हैं, वहीं आवागमन की बात की जाए तो यहां की स्थिति पानी में प्यासी मछली की तरह है। राष्ट्रीय राजमार्ग का क्षेत्र होने के बावजूद वाहनों का इंतजार और फिर लटकते हुए जाना यहां के लोगों का रोजमर्रा का कार्य है।
कुछ इसी तरह के हालात विधानसभा क्षेत्र के जन का मन टटोलने मावली से मारवाड़ के बीच संचालित मीटरगेज की रेल लाइन से मंगलवार को कुंवाथल की ओर से इस क्षेत्र में प्रवेश करते हुए भीम से आगे तक का सफर करने के दौरान लोगों ने बयां किए। रेल में कुंवाथल और दौलाजी का कुआं से काफी संख्या में महिलाएं व कुछ पुरुष देवगढ़ में मेला देखने के लिए सवार हुए। इनमें एक महिला राजकी बाई गुर्जर ने बताया कि दौलाजी का खेड़ा में आज भी पानी की समस्या बनी हुई है। अपनी भाषा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नेता लोग तो चुनाव रो टेम वे जदी आवे न झूठी वातां करी न परा जावे पछे सिकल तक नी दिखावे। इसी महिला ने रेलवे स्टेशन पर पूर्व में मिलने वाली सुविधाएं जैसे टिकट खिडक़ी बंद होने, पेयजल व बैठने की सुविधाओं को लेकर भी शिकायत की।
देवगढ़ रेलवे स्टेशन पर उतर कर बाहर आने पर कामला गांव के देवा बा एक्टिवा के साथ मिले, जिन्होंने कहा कि मारी आशंग कोई नी बापू किक लगाईन गाड़ी चालु करी दो। इस पर उनकी एक्टिवा को स्टार्ट किया, लेकिन वह फिर बंद हो गई तो दुबारा से स्टार्ट की। इस दौरान 2-4 मिनट के समय में उनसे बात करने का अवसर मिल गया। पूछने पर बताया कि कई विकास कोनी वियो गाम में जावा री हडक़ (सडक़) तक नी वणी, नालियां तो वणी पण पाणी री परेशानी है। गांव में पनघट लाग्यो तको है पण वणी में पाणी बराबर नी आवे। इसके बाद देवगढ़ बस स्टैण्ड पर मिले मुकेश आच्छा से बात की तो उन्होंने बताया कि वे केलवा में मार्बल में काम करते हैं। देवगढ़ से अप-डाउन करते हैं, लेकिन पिछले काफी समय में सुबह के समय उदयपुर जाने वाली रोडवेज बस बंद हो जाने से उन्हें परेशानी हो रही है। इसको लेकर कई बार विधायक तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि उस बस से काफी संख्या में लोग उदयपुर तक जाते थे, जिन्हें अब आवागमन में काफी दिक्कत होती है। इसके बाद तीन बत्ती चौराहा स्थित एक नाश्ता सेन्टर पर बैठे इशरमण्ड के पारस से बात की तो वे उल्टा प्रश्न कर बैठे कि विकास तो कई व्यो? उन्होंने बताया कि गांव में सडक़ें खस्ताहाल है, पानी की समस्या है। विधायक के बारे में पूछने पर बताया कि वी तो जित्यां केड़े पाछी सकल नी वताई। वोट के लिए पूछा तो तपाक से एक पार्टी का नाम लेते हुए कहा कि वोट तो जिने देता आइरां वीनेइज दंागा।
इसके बाद कामलीघाट चौराहा पार करके मारवाड़ की ओर जाने वाली कालीघाटी मार्ग की ओर बढ़े तो 3-4 किलोमीटर आगे एक किराणा स्टोर पर बैठे धन्नासिंह रावत ने बात करने पर उन्होंने बताया कि विधायक तो उनके गांव में कभी आते नहीं, सिर्फ चुनाव में शकल दिखाने आए थे। पास ही स्थित उनके गांव वीरम गुड़ा पहुंचे तो नारायण सिंह खेत में बकरियां चरा रहे थे। बात करने पर बताया कि गांव में सडक़ तो बन गई, लेकिन पानी की समस्या है। दो-तीन हैण्डपंप हैं, लेकिन उनमें पानी काफी कम है। काम-धंधे के बारे में पूछने पर बताया कि पूरा गाम में खाली आरक्षण में एक नौकरी वाळो है बाकी कणीनेइ काम नी मिल्यो। मोट्यार गुजरात में काम करवा जावे। ज्यादातर मनखां रे खेती रो काम है पण पाणी री समस्या है, जो खेती भी कई करां। पास ही बैठी महिला तीजी बाई ने बताया कि उनके घर में सरकारी योजना से शौचालय तो बन गया, लेकिन उसकी राशि 3-4 माह बाद मिलने से दिक्कत हुई। इन्होंने कहा कि गांव में शराब बंद वेइगी यो काम जरूर हाउ व्यो। यहां से भीम के आगे टाडगढ़ रोड पर निम्बा की कुई गांव पहुंचे जहां कच्चा व उबड़-खाबड़ रास्ता था। गांव के नरेन्द्रसिंह ने बताया कि जीतने के बाद विधायक नहीं आए। विकास तो दूर महज डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक सडक़ भी नहीं बनवा पाए। बताया कि गांव में पानी की समस्या है।

स्कूल के सामने श्मशान से दिक्कत
गांव के ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में गुण्डागर्दी काफी है, जिससे लोग डरते हैं। एक युवा ने स्कूल के आगे मुख्य मार्ग किनारे एक समाज का श्मशान होने की समस्या बताई पर नाम बताने को राजी नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने और ग्रामीणों को बुलवाया और पत्रिका टीवी के कैमरे पर सभी ने एक साथ यह समस्या बताई। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्कूल के सामने ही श्मशान के कारण यहां अंतिम संस्कार के समय बच्चों को डर लगता है। ऐसे में बच्चों को जल्दी घर भेज देते हैं। गत दिनों भी इस स्थिति के चलते दो बच्चे बीमार हो गए थे। बताया कि विधायक तक शिकायत की पर कार्रवाई नहीं हुई। विद्यालय में 16 बच्चे अध्ययनरत हैं व दो शिक्षिकाएं सरिता व ममता कार्यरत हैं। इन्होंने भी बताया कि श्मशान से दिक्कत तो है।

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