गंगापुरसिटी. दीपावली का त्योहार नजदीक आने का असर यहां दूध डेयरी पर देखने को मिल रहा है। त्योहर पर मिठाइयों की मांग के चलते डेयरी पर दूध की आवक में कमी आई है। बीते दिनों की तुलना में इन दिनों डेयरी पर दूध की आवक करीब आधी रह गई है। सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह पूर्व डेयरी पर प्रतिदिन औसतन 3500 लीटर की दूध की आवक हो रही थी, लेकिन बाजार में दूध की मांग बढऩे के चलते वर्तमान में डेयरी पर दूध की आवक 2000 लीटर ही रह गई है। गौरतलब है कि डेयरी पर दूध के दाम फैट के आधार पर निर्धारित होते हैं। भुगतान के लिए इंतजार भी करना पड़ता है। ऐसे में दूध आपूर्तिकर्ता मांग अधिक होने पर बाजार में आपूर्ति करते हैं।
और भी घट सकती है आवक
डेयरी सूत्रों के अनुसार आगामी दिनों में दूध की आवक में और भी कमी आ सकती है। इसका कारण है कि पशुपालक स्वयं के लिए मिठाई बनाने में दूध को काम में लेते हैं। इसके अलावा गांव में भी दूध की मांग बढ़ जाती है। इसके चलते पशुपालक उपलब्ध होने पर दूध को स्थानीय स्तर ही बेच देते हैं। ऐसे में डेयरी तक दूध की आवक नहीं हो पाती है।
भेजते है हिण्डौन
डेयरी पर पूर्व में दूध उत्पाद तैयार किए जाते थे, लेकिन यहां यह कार्य कई वर्षों से बंद है। इसके चलते डेयरी पर आने वाले दूध को यहां पर चिलर में ठंडा किया जाता है। इसके बाद दूध को हिण्डौनसिटी की डेयरी में भेज दिया जाता है। गौरतलब है कि शहर में 37 साल पूर्व वर्ष 1981 में डेयरी स्थापित की गई थी। इसके बाद कभी दूध पैकिंग कार्य हुआ तो कभी दूध संग्रहण बंद भी रहा।
दो दर्जन समितियां
सवाई माधोपुर-करौली जिला दूग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अधीन डेयरी पर दो दर्जन दूग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दूध की आपूर्ति की जाती है। वर्तमान में मीनापाडा, नानवास, मेडी, बालौती, बलुआपुरा, पीलोदापुरा, गोविन्दपुरा, गंगाजी की कोठी आदि स्थानों से दूध की आपूर्ति हो रही हैं, जबक बाटोदा, मोरपा, मरमदा, पटपडी, निभेरा आदि स्थानों से दूध की आवक नहीं हैं। इसके चलते दूध की आवक में कमी आई है।
इस मामले में प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा का कहना है कि दीपवली के चलते डेयरी पर दूध की आवक में कमी आई है। 3500 लीटर से घट कर आवक 2000 लीटर रह गई है। दीपावली के बाद ही आवक बढऩे की संभावना है।
डेयरी पर एक नजर
डेयरी स्थापना 1981
दूध पैकिंग शुरू 2002
दूध पैकिंग बंद 2013
दूध संग्रहण बंद 2015
दूध संग्रहण चालू 2016





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