सीकर
सीकर में कांग्रेस की संकल्प रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को माला पहनाने के लिए मंच पर चढऩा एक सरकारी शिक्षक पर भारी पड़ गया है। रंग लाल नाम के शिक्षक के राजनीतिक रंग में अब रिटर्निंग ऑफिसर ने नौकरी से बर्खास्तगी के नोटिस का भंग डाल दिया है। जिससे अब शिक्षक की सरकारी नौकरी पर खतरा मंडरा गया है। शिक्षक एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का बेहद नजदीकी रहा है। सरकारी शिक्षक रंगलाल जो राजकीय प्राथमिक स्कूल खीचड़ों का बास में नियुक्त है। लेकिन, रैली के दिन स्कूल की बजाय रंगलाल मंच पर राहुल गांधी को माला पहनाने के लिए उतावला नजर आ रहा था।
मंच पर चढ़े शिक्षक रंगलाल के राजनीतिक रंग में उस समय भंग पड़ गया, जब निर्वाचन शाखा की नजरनुमा कैमरे में यह शिक्षक कैद हो गया। मामले में सीकर विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर ने इस शिक्षक को नोटिस जारी किया है। जिसमें कांग्रेस के मंच पर चढऩे को आचार संहिता का उल्लंघन और राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियमों के खिलाफ बताते हुए पूछा गया है कि क्यों नहीं उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए। मामले में शिक्षक को 24 घंटे में नोटिस का जवाब देने को कहा गया है।
राहुल गांधी के मंच पर शिक्षक को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर ने जिला शिक्षा विभाग से भी सवाल पूछे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी से पूछा गया है कि शिक्षक की स्कूल में शिक्षा विभाग ने पिछले छह महीने में कितनी बार निरीक्षण किया है। शिक्षक की स्कूल में उपस्थिति कितनी रही है और स्कूल के बच्चों का शैक्षिक स्तर कैसा है। इसके अलावा शिक्षक की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता और पद स्थापन सरीखी जानकारी भी मांगी गई हैं। यानी साफ है कि शिक्षक की राजनीतिक सक्रियता पर जिला निर्वाचन विभाग सख्त हो गया है।
यह बात अलग है कि शिक्षक रंगलाल पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया का करीबी बताया जा रहा है। जिससे मामले में अब देखने वाली बात यह हो गई है कि क्या राजनीतिक रसूख शिक्षक रंगलाल को फिर से बचा पाएगा? क्योंकि इससे पहले भी रंगलाल पर स्कूल से बिना बताए गायब रहने के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन मामलों में कभी कोई कार्रवाई नहीं देखी गई। बहरहाल जिला निर्वाचन विभाग ने तीन और सरकारी कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किया है। जिन्हें झूठे आधारों पर चुनाव ड्यूटी कटवाने का दोषी पाया गया है।





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