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सुरेश जैन
पुर [भीलवाड़ा]।
शहर से दस किलोमीटर दूर गंगापुर रोड स्थित उपनगर पुर भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा है। यहां की आबादी चार वार्ड में फैली हुई है । जिले की राजनीति में इस क्षेत्र का खास महत्व है। धार्मिक स्थलों के संगम के साथ ही यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं है। भीलवाड़ा-उदयपुर वाया राजसमंद फोरलेन मार्ग बनने के बाद विकास की संभावना जगी थी, लेकिन इसी फोरलेन के अब उपनगर पुर के बाइपास में तब्दील होने से क्षेत्र विकास में पिछड़ गया है। रोडवेज व निजी बसें भी अब कस्बें में नाम मात्र की आ रही हैौ। क्षेत्र के बाशिन्दे मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे है। चुनावी मौसम में पुराने वादे सामने आने लगे है। भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की पचास हजार की आबादी का ये हिस्सा क्यूं अब पिछड़ता जा रहा है, ये जानने के लिए मैं उपनगर पुर पहुंचा।
यहां बस स्टैण्ड स्थित एक पान की दुकान पर हो रही चुनावी चर्चा में मैं भी शामिल हो गया। यहां जमनालाल छीपा से पूछा, भाई साहब चुनाव आ गए। क्या चर्चा है तो वे झल्ला कर बोले कि चुनाव आ गए तो क्या करें। पुर इतना बड़ा कस्बा। ५० हजार की आबादी है। यह शाहपुरा से भी बड़ा कस्बा है, लेकिन चिकित्सालय के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। सर्दी जुकाम को छोड़कर यहां किसी प्रकार के इलाज की सुविधा नहीं है। किसी महिला को प्रसव पीड़ा हो जाए तो उसे रात को ही भीलवाड़ा शहर लेकर जाना पड़ता है। चोट लग जाए जो प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा भी रात में नहीं है। पास ही खड़े राजेश शर्मा की भी पीड़ा थी कि गत चुनाव में सभी ने निर्णय किया था कि मतदान नहीं करेंगे। लेकिन विधायक वि_लशंकर अवस्थी ने आश्वासन दिया था कि चुनाव बाद यहां सुविधा उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं ने उनके कहने पर वोट तो दे दिए, लेकिन पांच साल होने के आए, सुविधा कुछ भी नहीं मिली।
बेरोजगारी समस्या, 12 घंटे के 250 रुपए
पुर के चौराहे पर युवा भी नजर आ गए, उनसे पुर व चुनाव के हाल पूछे तो वे भी खासे नाराज दिखे। उनकी पीड़ा थी कि देश की ख्यात नाम औद्योगिक इकाई क्षेत्र में स्थापित है और औद्योगिक क्षेत्र भी सटा है। इसके बावजूद रोजगार के लिए भटक रहे है। रीको एरिया स्थित फैक्ट्री में काम पर जाते है। 12-12 घंटे काम करने के बाद भी मजदूरी के नाम पर 200, 250, 300 रुपए से ज्यादा नहीं मिलते है।
समस्याओं का समाधान तो होता नही
पुर में ही मुबारिक हुसैन मिले। वे बोले कि समस्याओं का समाधान तो होता नहीं है। उनसे पूछा कि ऐसी क्या समस्या जिसका समधान नहीं हो रहा है। इस पर मुबारिक के साथ ही खड़े सलीम ने कहा कि हर घर में बेरोजगार युवक है। उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। यहां से चार सौ मीटर दूरी पर बड़ी औद्योगिक इकाई है, लेकिन स्थानीय लोगों को यहां रोजगार नहीं दिया जा रहा।
चार पार्षद, फिर भी अनदेखी
पुर के मोहल्लों में घूमने के दौरान ही अशोक जैन, योगेश सोनी व भंवर विश्नोई मिले। तीनों का कहना था कि पुर में चार पार्षद है। फिर भी विकास के नाम पर कुछ नहीं है। यहां क्यारा के बालाजी, अधरशिला, पातोला महादेव तथा घाटारानी दर्शनीय एवं धार्मिक स्थल है, लेकिन इनका विकास नहीं हो रहा है। पुरा सम्पदा का भी यहां संरक्षण नहीं हो रहा है। पुर अभी पगडंडियों में बसा हुआ है, अतिक्रमण ने बाजार की शक्ल ही बदल दी है। बिजली, सड़क, सफाई बेहाल है। उपस्वास्थ्य केन्द्र में नियुक्त चिकित्सक भी प्रतिनियुक्ति पर है। पुलिस थाना भी आबादी से बाहर है। पुर ओवरब्रिज भी तकनीकी रूप से ठीक नहीं है, आए दिन यहां हादसे हो रहे है।
धमाकों से आ रही दरार
पुर का सबसे बड़ा तालाब है। कभी यहां बारह माह पानी रहता था, लेकिन अब इसमें दूषित पानी आ रहा है। मवेशी भी पानी नहीं पी सकते है। गोशाला नहीं होने से मवेशी खुले में घूम रहे है। रोडवेज की लगभग सभी बसें बाइपास से निकलती है। कहीं जाना है तो गोशाला चौराहा या पुर थाने के यहां खड़ा रहना व उतरना पड़ता है। सड़कें, नालियां व अन्य समस्या तो आम है। औद्योगिक इकाई में खनन के लिए हो रही ब्लास्टिंग से कई मकानों में दरारे आ गई। इसकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। पुर में चरनोट की जमीन थी, उसे भी खनन के लिए आवंटन कर दी। अब मवेशी खुले आम सड़कों पर घुम रहे है।
फैक्ट फाइल
वार्ड-1 से 4
आबादी- 50 हजार
मतदाता- 15 हजार से अधिक
उपनगर पुर के खेड़े- माली खेड़ा, बलाई खेड़ा, जाटो का खेड़ा, कुम्हारिया, खारोलिया, मंगलपुरा, लक्ष्मीपुरा, कंजरबस्ती जुडे है।
जातियां-ब्राह्मण, महाजन, जैन,विश्नोई, माली,बैरवा,मुस्लिम व अन्य।





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