आबूरोड. शिक्षा विभाग एक तरफ विकास कार्यों के लिए बजट नहीं होने का हवाला देता है, वहीं दूसरी तरफ बजट का सदुपयोग करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। स्कूलों में कभी स्वच्छता तो कभी विकास के नाम पर बजट स्वीकृत तो कर दिया जाता है, पर इस बजट का उपयोग किस प्रकार होता है इसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। कुछ ऐसा ही हाल स्कूलों में लगाए गए सेनिटरी इंसिनरेटर मशीन व हैंड वॉश यूनिट का है। स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय के तहत बालिका स्वास्थ्य को लेकर सेनेटरी नेपकीन के इस्तमाल के लिए लगाई गई इंसिनेटर मशीन एवं छात्रों के हाथ धोने की सुविधा के लिए हैंड वॉश यूनिट बनाई गई।
जानकारी के अनुसार पूर्व में जिन विद्यालयों में पीएफसी के वित्तीय सहयोग से बनाए गए शौचालय व मूत्रालय बनाए गए थे। उनमें रनिंग वॉटर सुविधा व सामूहिक हाथ धोने की सुविधा-इंसिनरेटर लगाना आदि कार्य करवाए जाने थे, लेकिन कार्यों की मॉनिटरिंग नहीं होने से स्कूलों में करीब 24,388 रुपए की लागत से दो इंसिनरेटर मशीन व 25,424 रुपए की लागत से दो हैंड वॉश यूनिट लगाई गई थी। घटिया निर्माणकार्य के चलते बनने के छह माह के भीतर ही हैंड वॉश यूनिट बिखरने लगा है। स्कूलों में पेयजल की उचित सुविधा नहीं होने से बनने के बाद कभी इनका उपयोग नहीं किया। अधिकतर स्कूलों में इंसिनरेटर भी डब्बे में सील पैक बंद पड़े हैं। ऐेसे में प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के चलते क्षेत्र में किए गए इस कार्य में लाखों की राशि का दुरुपयोग होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
ये है स्कूलों में कार्य
की स्थिति
समीपवर्ती सियावा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की बात करें तो यहां हैंड वॉश यूनिट का निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन होने से छह माह के भीतर ही टाइल्स निकलने लगी व सीमेंट उखडऩे लगा। वहीं इंसिनरेटर मशीन लगाने के बाद से ही सील पैक कमरे में बंद पड़ी रही। संस्था प्रधान भीमाराम ने बताया कि एक बार तो निर्माण कार्य ठीक नहीं होने पर कार्य रुकवाया गया था।फर्म के जेईएन ने कहा कि जिला स्तर पर कार्य का ठेका हुआहै, स्कूल से इसका कोई लेना देना नहीं है।मशीन ऐसे ही कमरे में रखवाई गई थी, शौचालय पर नहीं लगाने से इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है।वहीं लाम्बी रोड प्राथमिक विद्यालय में भी कुछ यहीं हाल यहां भी मशीन नहीं लगाई गई है, केवल स्कूल प्रशासन को मशीन सील पैक प्रदान कर दी गई है। जबकि सम्बंधित फर्म के व्यक्ति ने चैक प्राप्त करते समय लिखित रूप से दिया कि हैंड वॉश यूनिट व इसके अलावा पीपरमाल व बोरपानी समेत भाखर क्षेत्र में यह लगवाए गए थे। जिनका उचित उपयोग नहीं किया जा रहा है।





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