आबूरोड. आदिवासी बाहुल्य तहसील आबूरोड के कई विद्यालयों में एक माह से पोषाहार नहीं पकाया जा रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों में कुपोषण दूर करने की पौष्टिक आहार की पोषाहार योजना का फायदा नहीं मिल रहा है। वहीं विभागीय अधिकारी भी इस सम्बंध में जानकारी होने के बावजूद सामग्री उपलब्ध करवाने पर ध्यान नहीं दे रहे। विभागीय लापरवाही का खमियाजा नौनिहालों को
भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में कई स्कूलों में केवल दूध ही प्रदान किया जा रहा है। पत्रिका संवाददाता के शहर के आसपास के सरकारी स्कूलों में जायजा लेने पर दो विद्यालयों में अप्रेल के बाद से पोषाहार सामग्री की आपूर्ति नहीं होना पाया। इसके बाद अन्य स्कूलों से उधार लेकर व राशन डीलरों से सामग्री लेकर कार्य चलाया जा रहा था लेकिन गत सितम्बर से पोषाहार पकाना बंद है। जब शहर के पास स्थित स्कूलों का यह हाल है तो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के विद्यालयों का अनुमान लगाया जा सकता है।
बच्चे ला रहे टिफिन
शहर के आसपास के ऐसे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे अभी घर से टिफिन ला रहे हैं। इनमें कई बच्चों के परिजन मजदूर वर्ग से होने से सुबह जल्दी निकल जाते हैं। ऐसे में बच्चों के लिए भोजन पका पाना सम्भव नहीं हो पाता। नतीजतन बच्चों को दूध पीकर ही शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। आदिवासी क्षेत्र में अधिकतर बच्चे गरीब तबके के होने के कारण कुपोषण की समस्या अधिक है। तहसील क्षेत्र में 134 प्राथमिक विद्यालयों व 28 उच्च प्राथमिक विद्यालयों समेत उच्च माध्यमिक स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को पोषाहार प्रदान किया जाता है।
ये हंै प्रावधान
विभागीय सूत्रों की मानें तो स्कूलों में किसी कारणवश पोषाहार सामग्री नहीं मिल पाने पर आसपास के अन्य विद्यालय से उधार लेकर पकाना पड़ता है। यह व्यवस्था किसी भी स्थिति में एक दिन भी बंद नहीं रखी जा सकती लेकिन कई विद्यालयों के आसपास के विद्यालय में भी सामग्री उपलब्ध नहीं है। समस्या के चलते विभाग की ओर से रसद विभाग से सम्पर्क कर गांव के राशन डीलर से पोषाहार सामग्री लेने के निर्देश दिए गए थे लेकिन शिक्षकों के डीलरों से सामग्री मांगने पर राशनकार्डधारकों से सामग्री बचने पर देने के लिए कह दिया जाता है। 27 सितम्बर को न्यायालय ने राशन की दुकानों से गेहंू आपूर्ति के विभाग को निर्देश दिए थे, इसके बावजूद अब तक कई विद्यालय पोषाहार की कमी से जूझ रहे हैं।
केस-1
राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय सांतपुर में पोषाहार व्यवस्था की जानकारी लेने पर संस्था प्रधान लीला गरासिया ने बताया कि 28 अप्रेल को अंतिम बार आपूर्ति की गई थी। इसके बाद आसपास के स्कूलों व राशन डीलर से एक दो कट्टे लाकर काम चलाया जा रहा था। सितम्बर में सामग्री समाप्त होने पर पोषाहार पकाने का कार्य भी बंद हो गया। अंतिम बार 9 सितम्बर को पोषाहार पकाया गया था। स्कूल में 182 छात्रों का नामांकन है।
केस-2
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चारणियाफली (सांतपुर) में अंतिम बार 6 सितम्बर को पोषाहार पकाया गया था। संस्था प्रधान डायालाल कुम्हार ने बताया कि अंतिम बार आपूर्ति 28 अप्रेल को की गई थी। आपूर्ति खत्म होने पर पीइइओके माध्यम से बीइइओ को पत्र भेजकर आपूर्ति करवाने की मांग की थी। स्कूल में 309 बच्चों का नामांकन है।
क्षेत्र के स्कूलों में पोषाहार वितरण कल से हो जाएगा। स्कूलों में पोषाहार नहीं पकाने जैसी स्थिति नहीं है।
- दलपतराज पुरोहित,जिला शिक्षा अधिकारी, आबूरोड





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