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‘बड़ा बदनसीब है वो जिसकी मां होते हुए भी साथ नहीं’

आमेट. नगर पालिका मण्डल द्वारा आयोजित 43 वें विशाल पशु मेले के आखिरी दिन सांस्कृतिक रंगमंच पर सोमवार रात्रि को चली काव्य निशा में देश के कोने-कोने से आए रचनाकारंों की एक से बढक़र एक रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक पाण्डाल में जमे रहने को मजबूर कर दिया।
सम्मेलन का शुभारंभ पालिका मण्डल के कर्मचारियों, पार्षदों व मेला कमेटी द्वारा कवियों एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। सम्मेलन की शुरुआत कवियत्री रूचि चतुर्वेदी ने मां सरस्वती को शब्द सुमन अर्पित कर मां शारदे वरदान दे, सदज्ञान दे, की प्रस्तुति के साथ की। इसके बाद हास्य कवि कानु पण्डित नाथद्वारा ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए जितना तेरे देश का बजट है, उतना तो हिन्दुस्तानी परिवार नियोजन को सफल बनाने में खर्च कर देते है, रचना सुनाई। साथ ही व्यंग रचना बहनों की खुशियां तुझ पर वार दी बेटे, बूढ़े मां-बाप का कर्ज मत भुला देना, पढ़ी। भोपाल के वीररस के कवि सुमित ओरछा की कविता कुछ ऐसे भी बेटे हुए हैं मां भारती के भाल में, सिर सदा कटाते रहे मां भारती की शहादत में, बनना हो तो भगतसिंह, सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद बनो, एवं पूरब से लेकर पश्चिम तक सभी दिशा में राज तुम्हारा, आजादी मिलते ही जीत लिया भारत सारा, रचना पढ़ी तो श्रोता वाह-वाह किए बिना नहीं रह सके। उदयपुर के शायर सम्पत कबीर की रचना शिव की भांति घोर हलाहल हलक में हमने भी उतारा था, कांकरोली के हास्य व्यंग्य के कवि सुनील व्यास ने छोटी-छोटी रचनाओं से गुदगुदाया। नामली की कवियत्री सुमित्रा सरल ने शृंगार गीत ये पायल अगर सुबह खनकी होती तो घर को धाम कर देती, एवं जालिम है दुनिया बेटियों को रोक देती है, सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। मन्दसौर के हास्य व शृंगार रस के कवि मुन्ना बैटरी ने गजल अपने जख्मों को भी अपना बनाया हमने, आपके लिए खुद को दिल मे जलाया हमने, पेश की। मथुरा के वीररस के कवि प्रख्यात मिश्रा ने दुनिया कायल है मोदी की, लेकिन कमी खलती है आज भी अटल बिहारी की, रचना सुनाकर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। आगरा की कवयित्री रुचि चतुर्वेदी की कविता में बिंदू से रेखा बनाने चली हूं, सुनाकर वीरह की स्थिति का परिचय कराया। अंत में संचालन कर रहे सुजालपुर के गोविन्द राठी ने वीर पत्ता व पन्नाधाय को याद करते हुए जिसकी समसिर नसीर बनी, ऐसे वीर पत्ता की धरती को नमन, रचना पढक़र क्षेत्र के इतिहास को याद किया। इस अवसर पर चेयरमैन नर्बदा देवी बागवान, समाजसेवी भरत बागवान, दिलीपसिंह राव, मेला कमेटी अध्यक्ष रतनसिंह राठौड़, सज्जनसिंह सोलंकी, भगवत सिंह राव, यशवंतए चोरडिया, जयसिंह भाटी, हीरालाल कुमावत, सुनील गांधी, पार्षद राधेश्याम खटीक, शांतिलाल जीनगर, दिनेश सरनोत, अरूण मिश्रा आदि मौजूद थे।



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