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दीपावली से पहले मनीषा जला रही शिक्षा के दीपक

दृष्टिबाधित बीएड छात्रा का पढऩे और पढ़ाने का जज्बा
दीपावली से पहले मनीषा जला रही शिक्षा के दीपक
प्रशिक्षण के लिए रोज 50 किमी से अधिक का सफर

बाड़मेर . शहर के गांधीनगर स्कूल के विद्यार्थियों को बीएड की एक प्रशिक्षु छात्रा इतना बड़ा सबक दे रही है कि इन पढऩे वाले बच्चों की आंखों में जीवनभर रोशनी रहेगी। छात्राध्यापिका है मनीषा, जो जन्म से दृष्टिबाधित है। उसको पढ़ाते देख ये बालक-बालिकाएं जीवन का एक पाठ सीख गए हैं कि विपरीत परिस्थितियां हारती हैं, हराने वाला चाहिए और जीवन की कोई एक कमी किसी को आगे बढऩे से नहीं रोक सकती।
बीएड प्रशिक्षणार्थी इन दिनों विभिन्न सरकारी स्कूलांे में पाठ पढ़ाने पहुंच रहे है। गांधीचौक स्कूल में एक छात्राध्यापिका पहुंची तो सभी हतप्रभ रह गए। इस छात्राध्यापिका को तो कुछ दिखाई नहीं देता।
शिक्षकों और विद्यार्थियों में कौतूहल था कि अब यह कैसे पढ़ाएंगी और वे किस तरह पढ़ेंगे। देखते ही देखते दांतों तले अंगुलियां दब गई। बेबाकी, बेहिचक और बिना किसी रुकावट के उसने पढ़ाना शुरू किया। कंठस्थ पाठ, प्रश्न और फिर सवाल-जवाब। एक-एक विद्यार्थी एेसे जुड़ गया जैसे वो आज बड़ा सबक ले रहा हो।
दृष्टिबाधित मनीषा ने हर बच्चे की आंखों में आत्मविश्वास की एेसी रोशनी भर दी कि वे इसके चर्चे स्कूल ही नहीं घर तक करने लगे। अभिभावकों ने भी बच्चों के मुंह से मनीषा की बातें सुनी तो यही कहा-देखो बेटा, यही सबक है। सीखो, वह तुम्हें पढ़ाने नहीं जीवन की नाउम्मीदियों के तमाम अंधेरे मिटाने आई है। दीपावली से पहले मनीषा मानो यहां बच्चों के मन में शिक्षा के दीपक रोशन करने पहुंची है।
पढ़ाई नहीं छोड़ी
&चौहटन क्षेत्र के सरूपे का तला में दसवीं तक शिक्षा हुई। अपनी पढ़ाई के साथ वह गांव के अन्य बच्चों को भी पढ़ाती रही। वहीं से उसे लगा कि शिक्षक बनना चाहिए। अपने इसी मुकाम को हासिल करने के लिए 12वीं की पढ़ाई चौहटन में पूरी करने के बाद बाड़मेर के एबीसी गल्र्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की। पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।
- मनीषा, छात्राध्यापिका



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