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सावधान! कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं खेल रहा यह खतरनाक खेल

सीकर. सावधान कहीं आपका बच्चा भी तो यह खतरनाक खेल नहीं खेल रहा। यह खेल खेलना बच्चे की जान के लिए खतरनाक हो सकता है। इस खेल का नाम है 'मोमोÓ। ब्लू व्हेल गेम के बाद अब मोमो चैलेंज खेल जानलेवा बन रहा है। इस खेल के चलते उड़ीसा व अन्य जगह हुई मौत के बाद राजस्थान में भी इसने लोगों की नींद उड़ा दी है। सोशल साइट्स के माध्यम से बच्चों में मोमो चैलेंज नामक खेल का प्रचलन बढ़ रहा है। इस खेल में वाट्सऐेप पर अनजान नंबरों के माध्यम से बच्चों एवं युवाओं को फंसाया जाता है। इसके बाद मोमो चैलेंज दिया जाता है। इसमें खेल में शामिल बच्चों एवं युवाओं को इतना डराया व परेशान किया जाता है कि वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। प्रदेश में इस खेल को लेकर शिक्षा विभाग ने बच्चों को जागरूक करने के लिए अलर्ट भी जारी किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने राज्य के सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है कि बच्चों में वाट्सएप एवं अन्य सोशल साइट्स के माध्यम से मोमो चैलेंज नामक खेल का प्रचलन बढ़ रहा है। खेल के माध्यम से बच्चों को चुनौतियां दी जाती है और आत्महत्या जैसे कृत्य के लिए मजबूर किया जाता है। सभी विद्यालयों में इसे खेल बचने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक किया जाए।
बच्चों को नहीं दें स्मार्टफोन
पिछले दिनों अजमेर में एक छात्रा की मौत हो हुई तो परिजनों उनकी बेटी की मौत का जिम्मेदार मोमो चैलेंज खेल को बताया। परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी इस खेल में फंस गई थी। इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं जानकारों का कहना है कि यह खेल स्मार्ट फोन से खेला जाता है। ऐसे में छोटे बच्चों को ऐसा फोन नहीं दें।
क्या है मोमो चैलेंज खेल
-सबसे पहले वाट्सऐप पर अनजान नंबर आने लगते हैं।
-परेशानी शुरू होती है इन नंबरों के सेव करने के बाद।
-ये नंबर मोमो चैंलेंज देते हैं।
- इस खेल के माध्यम से अपराधी छोटे-छोटे बच्चों और युवाओं को फंसाते हैं।
- ब्लूव्हेल खेल की तरह ही यह चैलेंज यूजर को इतना परेशान करता है कि वे अपनी जान लेने से भी पीछे नहीं हटते।
- उसे खेल पूरा नहीं खेलने पर परिजनों की हत्या करने की बात कहकर डराया जाता है।
इनका कहना है
मोमो चैलेंज खतरनाक खेल है। बच्चे यह खेल नहीं खेलें, इसके लिए जिले के सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। जहां जरूरत पड़ेगी वहां काउंसलर की भी मदद ली जाएगी।
-पवन कुमार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, सीकर



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