गंगापुरसिटी . दगाबाज होते दिल को दुरुस्त रखने के लिए कृषि विभाग अब खासी कवायद करता नजर आ रहा है। रासायनिक खादों के बहुतेरे चलन से पनप रहे रोगों की रोकथाम के लिए विभाग किसानों को जैविक खेती कराने को प्रेरित कर रहा है। इससे जहां किसान खुशहाल होंगे। वहीं दिल संबंधी बीमारियों की भी रोकथाम होगी। सरकार की मंशा के अनुरूप विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। गंगापुरसिटी और बामनवास में इसके कलस्टर बनाने का काम शुरू हो गया है।
रासायनिक खादों से हो रही फसल स्वास्थ्य को खासा नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे मुख्य रूप से बीपी और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। किसान रासायनिक खादों को छोडक़र परंपरागत जैविक खेती को अपनाकर लोगों के स्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ को रोकें। इसके लिए विभाग को यह जिम्मा सौंपा गया है। कृषि विभाग इस मशक्कत में जुट गया है और किसानों को शुरुआत में एक-दो बीघा में अनिवार्य रूप से जैविक खेती करने के फायदा गिना रहा है। जैविक खेती के जरिए होने वाली फसल से लोगों का स्वास्थ्य दुरुस्त रहेगा। वहीं प्रदूषित होते वातावरण पर भी काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा।
२०-२० कलस्टर का लक्ष्य
कृषि विभाग ने गंगापुरसिटी और बामनवास में २०-२० कलस्टर बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें प्रति किसान के हिसाब से ०.४ हैक्टेयर का लक्ष्य रखा है। उत्पादन के हिसाब से इसे एक से दो हैक्टेयर तक किया जा सकता है। इसकी मंशा किसानों का जैविक खेती ओर रुख कराना है। इसमें किसानों को रासायनिक खाद से होने वाले नुकसान भी गिनाए जा रहे हैं, जिससे किसान जैविक खेती करने को प्रेरित हो सकें।
नहीं होगा नुकसान
कृषि विभाग का मानना है कि किसान अधिक उत्पादन के लालच में अंधाधुंध रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। किसान अभी तक जैविक खेती को उत्पादन के लिहाज से घाटे का सौदा मान रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पहले साल में उत्पादन में १० से २० प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, लेकिन दूसरे वर्ष में पर्याप्त कम्पोस्ट और जैविक खाद डालने से इसकी भरपाई हो जाएगी और उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। विभाग का कहना है कि देशी खेती के अनेक फायदे हैं। लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से जमीन की उपजाऊ क्षमता पर असर पड़ता है, जबकि जैविक खाद भूमि की उपजाऊ क्षमता को खत्म नहीं होने देते। जैविक खेती पर्यावरण के लिहाज से भी काफी मुफीद है।
इनका कहना है
सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पहले वर्ष उत्पादन में मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसकी भरपाई हो जाएगी। जैविक खेती से हम बीपी एवं हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से बच पाएंगे। इसके लिए कलस्टर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। उम्मीद कर रहे हैं किसान इसे अपनाएंगे। इस साल हम एक किसान को कम से कम एक से दो बीघा में जैविक खेती कराने का प्रयास कर रहे हैं।
- गोपाल शर्मा, कृषि अधिकारी गंगापुरसिटी





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