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सावधान! दूध कर रहा बीमार

- शेखावाटी में 48 नमूनों की जांच
- नेशनल मिल्क सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा

झुंझुनूं. नकली दूध के खतरे के बीच चौंकाने वाली खबर है। यहां गाय-भैंस का दूध भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रमुख वजह है पशुओं का गलत खानपान। इससे पशुओं के दूध में गंभीर बीमारियों का जनक विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) जमा हो रहा है। इसका खुलासा नेशनल मिल्क सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। झुंझुनूं जिले से लिए गए दूध के सभी दस नमूनों में एंटीबायोटिक व एल्फोटोक्सिन पाया गया है। जो कि शरीर में कई प्रकार की घातक बीमारियों को जन्म दे सकता है।

जानकारी के मुताबिक सर्वोच्च न्यायाल के निर्देशानुसार व दूध में मिलावट को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए थे। इस पर केन्द्र सरकार की ओर से पिछले माह प्रदेश सहित अन्य राज्यों में मिल्क सर्वे के दौरान दूध की क्वालिटी की जांच की गई थी। टीम की ओर से सीकर, झुंझुनूं व चूरू में 48 नमूने लिए गए थे। जिसमें सीकर में 13, झुंझुनूं में दस व चूरू में 25 नमूने जांच के लिए गए। जिनकी जांच में एंटीबायोटिक व एल्फोटोक्सिन पाया गया।

सड़े गले खाने से नुकसान
पशुपालन विभाग के डॉ. लादूराम चाहर ने बताया कि अक्सर लोग घरों में सड़ा गला खाना दुधारू पशुओं को खिला देते हैं, इसके अलावा कई पशुपालक पशुओं को शुद्ध चारा भी नहीं डालते। इससे हानिकारक टॉक्सिन पैदा हो जाता है, जो कि दूध में पाया जाता है। फफूंद लगा चारा-घास खाने से एल्फोटोक्सिन बी 1 से एम 1 में बदल जाता है। यह एक जहर की तरह होता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियां पैदा हो जाती है।

बिना सोचे समझे देते डोज
पशुपालन विभाग के डॉ. हरिसिंह ने बताया कि किसान पशुओं को जो एंटीबायोटिक देते हैं वो खून में घुल जाता है, बाद में दूध में मिल जाता है। एंटीबायोटिक मिला दूध मानव शरीर में पहुंचने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है।

त्योंहार पर भी केवल खानापूर्ति
झुंझुनूं. दीपावली का त्योंहार नजदीक आते ही स्वास्थ्य विभाग की ओर एक बार फिर मिलावट के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारियां कर ली गई है। जिले के बाहर से आने वाले घी, मावा व पनीर पर विशेष निगरानी रखते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं।स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिलावट के खिलाफ 22 अक्टूबर से अभियान शुरू किया जाएगा।

अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी विशेष परिस्थितियों में एक दुकान से दो से अधिक नमूने नहीं ले सकेगा। दूध व घी में मिलावट को देखते हुए संस्थानों व संग्रहण स्थानों से प्रतिदिन नमूने लेने होंगे। ऐसा नहीं करने पर अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।जिले में गठित दल को प्रतिदिन तीन निरीक्षण व नमूने लेना अनिवार्य होगा। इसकी रिपोर्ट रोजाना उच्चाधिकारियों को भेजनी होगी।

इनका कहना है...
सर्वे की रिपोर्ट हमे अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। जिले में समय-समय पर दूध के नमूने लेकर जांच के लिए भिजवाए जाते हैं।
डॉ. सुभाष खोलिया, सीएमएचओ (झुंझुनूं)।



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