झुंझुनूं. झुंझुनूं रोडवेज डिपो पुरानी बसों के सहारे चल रहा है। पुरानी बसे मुनाफा देने के बजाए घाटा दे रही हैं। झुंझुनंू डिपो को दो साल से कोई भी नई बस नहीं मिली है। नई बसें नहीं आने से यात्रियों को भी पुरानी खटारा बसों में ही हिचकौले खाने पड़ते हैं।
रोडवेज डिपो में ९१ बसें है। इनमें १५ बसें अनुबंधित शामिल हैं। पुरानी बसों से रोडवेज के घाटे को कम करने के बाजाए और बढ़ा रही है।पुरानी बसों को ठीक करवाने में ही अधिक खर्चा हो जाता है। ऐसे में पुरानी बसें झुंझुनूं डिपो के लिए सरदर्द बनी हुई है।
रोडवेज की पुरानी बसें आए दिन ब्रेक डाउन हो रही है। झुंझुनूं डिपो की दो से तीन बसें प्रतिदिन ब्रेक डाउन हो रही है। बसे ब्रेक डाउन होने से यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। लंबी दूरी के यात्री भी बसों के ब्रेक डाउन होने के कारण रोडवेज की बसों में यात्रा करने से कतराते हैं।
आठ साल में खराब
जानकारी के अनुसार आठ साल में बसें खराब हो जाती है। झुंझुनूं डिपो में पांच साल में महज २५ बसें मिली हैं। इसके अलावा अधिकांश बसें पुरानी है। ऐसे में अधिकांश बसें खराब होने के कगार पर है।आए दिन बसें खराब भी हो रही हैं। जिनका ठीक करने के लिए सामान नहीं मिलने पर वे ठीक होने के इंतजार में खड़ी ही रहती हैं।
दो साल पहले मिली थी १० बसें
झुंझुनूं डिपो में दो साल पूर्व नई बसें आई थी। डिपो को १० नईबसें दी गईथी। इससे पहले पांच साल पूर्व २५ बसें झुंझुनूं डिपो को मिली थी। पांच साल में डिपो को महज २५ नई बसें मिली हैं। इनमें से १५ बसें करीब पांच साल पुरानी हो चुकी हैं।
इनका कहना है..
झुंझुनूं डिपो को २०१३ में बसे नई बसें मिली थी उसके बाद जनवरी २०१७ में नईबसे मिली। इसके बाद झुंझुनूं डिपो को नई बसें नहीं मिली हैं।
वासुदेव शर्मा, मुख्य प्रबंधक, झुंझुनूं डिपो





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