जयपुर. आनंदपाल, राजमहल प्रकरण समेत अन्य प्रकरणों में हुई कार्रवाई से नाराज राजपूतों को भाजपा से जोडऩे के लिए पार्टी ने प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत पार्टी के बड़े नेता राजपूत समाज के प्रमुख नेताओं से मिल चुके हैं, वहीं डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी है। मानवेंद्र सिंह के पाला बदलने से हालात सुधरने की बजाय और टेढ़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कुछ समय पहले राजपूत समाज से आने वाले प्रमुख मंत्री और विधायकों से बातचीत भी की है।
सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री राजेन्द्र राठौड़, वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, ऊर्जा राज्यमंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, विधायक बाबू सिंह राठौड़ समेत कई नेताओं को राजपूतों को मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। उनसे कहा गया है कि वे समाज के बीच जाकर बताएं कि भाजपा ने 2013 में 29 सीटों पर राजपूत उम्मीदवार उतारे। इनमें से 24 जीते । कांग्रेस ने 15 राजपूतों को टिकट दिए और दो ही जीत पाए।
बोर्ड-निगम, यूआईटी में भी राजपूत नेताओं को एडजस्ट किया है। मानवेन्द के कांग्रेस में जाने के बाद भाजपा ने मारवाड़ के राजपूत नेताओं से भी चर्चा की है। उनको साथ रखने और राजपूतों के मानवेन्द्र सिंह के साथ नहीं जाने के कारण गिनाए हैं।
शेखावत प्रकरण से और बढ़ी नाराजगी
गजेन्द्र सिंह शेखावत को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनाने से राजपूतों में नाराजगी बढ़ गई थी। पार्टी ने डैमेज कंट्रोल किया और शेखावत को चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाकर राजस्थान भेजा था।
इसलिए परेशान
सरकार बनने के बाद मारवाड़ में हुए एक घटनाक्रम से राजपूत समाज में नाराजगी दिखी। एक के बाद एक कई प्रकरण हुए तो राजपूत समाज के नेता सार्वजनिक रूप से यह कहने लगे कि इस बार के चुनाव में भाजपा को वोट नहीं देंगे। उपचुनावों में भी राजपूत समाज खुलकर कांग्रेस के साथ आ गया। अजमेर समेत तीनों जगह हुए उपचुनावों में भाजपा को यह महसूस भी हो गया कि राजपूत नाराज हैं।





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