नोखा. क्षेत्र में इन दिनों वायरल फीवर के चलते घर-घर में बुखार के रोगी देखने को मिल रहे हैं। इसके चलते सरकारी व निजी अस्पतालों में बुखार के रोगियों की तादाद भी बढ़ गई है। बागड़ी अस्पताल में इलाज कराने आए बुखार के रोगियों में से अभी तक दर्जनभर मरीजों के डेंगू रोगी होने की पुष्टि हुई है। लेकिन नोखा शहर में डेंगू रोगियों से ज्यादा डेंगू का हौव्वा बना हुआ है। बुखार का कोई भी रोगी जैसे ही निजी अस्पताल में ईलाज कराने पहुंचता है, तो उसकी सीबीसी कराने के बाद प्लेटलेट कम होने की बात कहते हुए उसे डेंगू रोगी बताकर अस्पताल में भर्ती कर दिया जाता है।
तीन-चार दिन तक ईलाज के नाम पर उसकी जेब ढिल्ली कर उसे छुट्टी देकर घर भेज दिया जाता है। इतना ही नहीं, इस काम में गांवों में बैठे झोलाछाप डॉक्टर भी पीछे नहीं है, वे भी चांदी कूट रहे हैं। यह सारा खेल जिम्मेदारों की आंखों के सामने चल रहा है और वे मूकदर्शक बनकर बैठे हैं, कहीं कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
हंसासर के नरेंद्र ने बताया कि उसने बुखार आने पर निजी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। उसकी जांच कराने के बाद डेंगू बताते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। दो दिन से इलाज चल रहा है। इससे पहले उसका बड़ा भाई हड़मानाराम भी आठ दिन अस्पताल में भर्ती रहकर गया है।
७३८ घरों में सर्वे करने का दावा
ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. बजाज का कहना है कि डेंगू को लेकर रविवार को नोखा शहर के वार्ड २७,३२,३४ में कुल ७३८ घरों में सर्वे कर डेंगू रोकथाम की जानकारी दी गई। १०२४ जल स्त्रोतों में टेलिफोस डाला गया। ६६ कमरों में मच्छर मारने का स्प्रे किया गया। राणोराव तालाब का अवलोकन कर टेलिफोस डाला गया। जैन चौक में मच्छरों के लार्वा रोधी गतिविधि की गई। नगरपालिका की ओर से जैन चौक, महावीर चौक, कटला चौक सहित अन्य क्षेत्रों में फोगिंग की गई। सोमवार को वार्ड एक, १२, १३ में सर्वे किया जाएगा।





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