डॉ. सुशील सिंह चौहान/ उदयपुर. प्रशिक्षण के नाम पर जिले का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग प्रशिक्षु आशाओं के साथ 'ठगी भरे खेल में धकेल रहा है। त्योहार (नवरात्रि) से पहले शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, भुवाणा में पांच दिवसीय आशा मोड्युल 6 व 7 तृतीय चरण बैच का शुभारंभ कर असुविधाओं के बीच आशाओं का प्रशिक्षण पूरा कराया जा रहा है। खास बात है कि प्रशिक्षण में आवश्यक नवजात शिशु की डमी, एचबीएनसी कार्ड, चार्ट लेखन, चूषण पंप एवं कपड़ों के बिना उन्हें प्रशिक्षण देकर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है। प्रथम प्रशिक्षण प्राप्त आशाओं को शिविर के लिए चुना गया है, लेकिन हकीकत किसी से छिपी नहीं है कि शिविर में प्रशिक्षण दे रहे कुछ प्रशिक्षक खुद ही तीसरे चरण का प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हैं। राजस्थान पत्रिका की मंगलवार को हुई पड़ताल में सामने आया कि कुछ प्रशिक्षकों के पास उनकी योग्यता वाले प्रमाण-पत्र ही नहीं है। प्रशिक्षु आशाओं की परीक्षा के दौरान भी गड़बड़ी हुई कि उन्हें प्री की बजाए सीधे पोस्ट पेपर दे दिया गया। खास बात यह रही कि हाल ही करोड़ों रुपए की लागत से तैयार सीएचसी परिसर को चिकित्सा विभाग ने प्रशिक्षण के लिए रसोई घर बना दिया।
अस्थायी रसोई, फैली गंदगी
हाल ही में उद्घाटन के बाद आम रोगियों के लिए समर्पित सीएचसी परिसर में मंगलवार को खुले में अस्थायी रसोई बनाई गई। बर्तन धुले गए और गंदगी खुले में पड़ी रही। इससे पक्षी और श्वानों का परिसर में प्रवेश आम रहा। कायदे से भोजन निर्माण की व्यवस्था निजी होटल से होती है।
मरीजों के गद्दों पर प्रशिक्षण
कायदे से विभाग स्तर पर प्रशिक्षण के लिए निजी होटल या हॉल लेने का प्रचलन है, लेकिन पहली बार विभाग ने प्रशिक्षण के नाम पर सीएचसी के तीन वार्ड खाली करा दिए। जमीन पर दरी पट्टी बिछाने की बजाए मरीजों वाले नए गद्दे डाले गए। तीन हॉल में जारी अलग-अलग प्रशिक्षण के दौरान जूतो-चप्पल का जमावड़ा वार्ड कक्ष के बाहर लगा रहा।
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समय पर नहीं पहुंचे ट्रेनर
आदेश के तहत प्रशिक्षण सुबह १० बजे शुरू होना था, जबकि इसकी शुरुआत १२ बजे हो सकी। ट्रेनर्स की देरी के कारण ऐसा हुआ।
सरकारी फीस को चूना
हकीकत यह है कि प्रदेश की सरकार आशाओं की १०वी व १२वीं परीक्षा को लेकर गंभीर है। इसे ध्यान में रखकर सरकारी स्तर पर आशाओं की परीक्षा को लेकर आवेदन भराए गए। इसकी फीस सरकार ने दी। ये परीक्षा हाल ही में होनी है। ऐसे में करीब ७-८ आशाएं प्रशिक्षण के बीच परीक्षा देने नहीं जा पाएंगी।
निविदा अवधि समाप्त
्रप्रशिक्षण भवन एवं भोजन को लेकर संवेदक की अवधि समाप्त हो चुकी है। प्रशिक्षण भी अनिवार्य है। राजस्व बचाने के लिए बिल्डिंग में प्रशिक्षण रखा था। अन्य कमियों के बारे में पता कर ही बता सकूंगा।
डॉ. दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग





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