बामनवास. उपखंड क्षेत्र में दशहरा पर्व पर पिछले करीब दो दशक से दशानन के पुतले का दहन नहीं हो रहा है। करीब-करीब बंद सी हुई यह परम्परा अब लोगों में चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि इसके पीछे कोई तर्क नहीं हैं।
करीब दो दशक पूर्व स्थानीय नवयुवक मंडल की ओर से इलेक्ट्रॉनिक झांकी एवं रावण के पुतले का दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाता था। इस दौरान एक बार विवाद होने पर नवयुवक मंडल की ओर से रावण के पुतले का दहन बंद कर दिया गया। इसके बाद से अब तक पंचायत प्रशासन की ओर से भी इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया।
नतीजन बामनवास में रावण दहन की परम्परा बंद सी हो गई है। यह अलग बात है कि गली-मोहल्लों में छोटे बच्चों की ओर से छोटा पुतला बनाकर फूंक लिया जाता है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कोई बड़ा रावण दहन का कार्यक्रम यहां बरसों से नहीं हो रहा। मजेदार बात यह है कि यहां के लोगों में रावण दहन को लेकर भी कोई दिलचस्पी नहीं है। कभी उनकी ओर से इस संबंध में प्रशासन अथवा ग्राम पंचायत से भी रावण दहन के कार्यक्रम करने की मांग भी नहीं की गई है।





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