नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि तेल बाजार उत्पादक संचालित है और मात्रा और कीमत दोनों उत्पादक देश तय करते हैं। ऐसे में उत्पादक और उपभोक्ता के बीच लागत कम करने के लिए साझेदारी होनी चाहिए। मोदी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की मौजूदगी में ऊर्जा क्षेत्र की दुनिया की प्रमुख कंपनियों के प्रमुखों और विशेषज्ञों के साथ दिल्ली में बैठक के दौरान यह बात कहीं। मोदी ने कहा कि भारत एक उपभोक्ता देश है और तेल की कीमतों में आई तेजी से संसाधन की तंगी के साथ ही कई आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। इसको पाटने के लिए तेल उत्पादक देशों के साथ सहयोग बहुत जरूरी है।
तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीक हस्तांतरण का अनुरोध
उन्होंने तेल उत्पादक देशों से विकासशील देशों के तेल क्षेत्र में व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में अपने निवेश योग्य अधिशेष का उपयोग करने की अपील की तथा विकसित देशों से प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण में निजी क्षेत्रों की भागीदारी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक गैस के व्यावसायिक उत्पादन में जहां उच्च दाब और अधिक तापमान वाली प्रौद्योगिकी की जरूरत है, वहां सहयोग किया जाना चाहिए।
तेल कंपनियों से स्थानीय मुद्रा में भुगतान लेने की अपील
उन्होंने तेल उत्पादक देशों से भुगतान के शर्ताें की समीक्षा करने की भी अपील की ताकि स्थानीय मुद्रा को फौरी राहत मिल सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भरपूर उत्पादन हो रहा है लेकिन तेल उत्पादकों ने इसकी कीमतें बढ़ाई हैं। तेल बाजार में उपभोक्ता और उत्पादकों के बीच साझेदारी की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी, जिससे अर्थव्यवस्था सुधरेगी।





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