जयपुर. कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए हरसंभव रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी परंपरागत वोट बैंक रहे मुस्लिमों के बहुल वाली उन 15-20 सीटों पर फोकस कर रही है, जहां वह जीतने की स्थिति में होने के बावजूद हार गई।
किशनपोल, हवामहल, आदर्श नगर हो या फिर कोटा उत्तर, रामगढ़, कामां, टोंक हो, मुस्लिम बहुल होने के बावजूद 2013 में कांग्रेस हर जगह चित्त हो गई। इनमें से कुछ सीटें तो ऐसी रहीं, जिन पर हार-जीत का अंतर काफी कम था। किशनपोल, आदर्श नगर, रामगढ़, कामां और कोटा उत्तर में तो सीधे-सीधे मुस्लिम निर्दलीय कांग्रेस की हार का कारण बने। ऐसी सीटों पर 5 से 6 मुस्लिम निर्दलीय मैदान में उतर जाते हैं। निर्दलियों को मिले वोटों से भी कम अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी हार जाता है। मुस्लिम वोटों का बिखराव न हो इसके लिए पार्टी ने रणनीति बनाई है कि निर्दलियों की संख्या कम से कम हो। इसके लिए दिल्ली, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों के कुछ बड़े मुस्लिम नेता नामांकन दाखिल तक प्रदेश में रहेंगे। गुपचुप तरीके से मुस्लिम बहुल इलाकों में घूमेंगे और यदि कोई मुस्लिम नेता निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल करता है तो उसे नामांकन वापसी के लिए मनाया जाएगा।
मुस्लिम सीटों पर निर्दलीय अधिक
मुस्लिम बहुल सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या अन्य सीटों के मुकाबले अधिक रहती आई है। 2013 में आदर्श नगर में कुल उम्मीदवार 33 थे, जिनमें से 18 मुस्लिम निर्दलीय उम्मीदवार थे। इसी तरह किशनपोल में 30 में से 15 और हवामहल में 22 में से 14 निर्दलीय मुस्लिम थे। इसी तरह के हाल प्रदेश के अन्य सीटों पर देखने को मिले थे। मुस्लिम वोट कटवाने के लिए मुस्लिम निर्दलीय खड़े करवाने के आरोप भाजपा पर भी
लगते रहे हैं।
नहीं तो जीत जाते
— जयपुर की किशनपोल सीट पर 2008 में कांग्रेस के अश्क अली टांक की 4339 वोटों की हार का मुख्य कारण मुस्लिम निर्दलीय उम्मीदवारों को माना गया था। तब करीब 4 हजार वोट अकेले मुस्लिम निर्दलियों ने हासिल किए थे।
— मोदी लहर के बावजूद आदर्श नगर सीट पर 2013 में भाजपा के अशोक परनामी की जीत महज 3803 वोट की थी। जबकि यहां से खड़े 18 मुस्लिम निर्दलियों को 4445 वोट मिले थे। इसी तरह 2008 में भी परनामी को 1718 वोटों से जीत उस हालत में मिली थी, जबकि 7 मुस्लिम निर्दलीय 4396 वोट ले गए थे।
— अलवर के रामगढ़ में भाजपा के ज्ञानदेव आहूजा ने कांग्रेस के जुबेर खान को लगातार दो बार हराया है। 2013 में आहूजा ने 4647 वोटों से जीत हासिल की थी। यहां बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया और उसने 7790 वोट ले लिए। ऐसे में जुबेर को हार का सामना करना पड़ा।
— कामां में भाजपा के जगत सिंह ने कांग्रेस की जाहिदा खान को 3357 वोटों से पराजित किया। यहां 10 मुस्लिम निर्दलियों ने 8150 वोट हासिल किए थे।
— हवामहल में कांग्रेस के बृजकिशोर शर्मा को मुस्लिम निर्दलियों ने हर चुनाव में परेशान किया है। 2013 में मुस्लिम निर्दलीय 12810 वोट ले गए, जबकि उनकी हार 12715 वोट से हुई थी। इससे पहले 2008 में वह बड़ी मुश्किल से चुनाव जीत सके थे।
— कोटा उत्तर में 2013 में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की हार का बड़ा कारण एक मुस्लिम निर्दलीय का चुनाव में उतरना रहा। वहीं टोंक में निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार सईद सऊदी ने कांग्रेस की जकिया को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था।





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