जयपुर ।
राज्य में कांग्रेस के छोटे नेताओं में मची टिकट की मारामारी के बीच बड़े नेताओं की अपनी अलग चिन्ता है। जिसका जितना बड़ा कद, वह खुद को उतना ही मजबूत दिखाने में जुटा है। इसके लिए वे अपनी-अपनी जड़ों यानी निर्वाचन सम्भाग में अतिरिक्त ताकत झोंक रहे हैं। ताकि पार्टी में बराबरी के नेताओं में तो कद का संदेश जाए ही, समूची सियासत में दबदबा नजर आए।
प्रदेश कांग्रेस में पिछले माह से शुरू हुई बड़ी सभाओं को देखें तो नेताओं में होड़ की यही स्थिति सामने आ रही है। जब भी किसी बड़े नेता के गृह संभाग में बड़ा आयोजन हुआ, उसने 2-3 दिन तक डेरा डालकर रणनीति बनाने और भीड़ जुटाने में पूरी ताकत लगा दी। जिस नेता को यह ताकत नहीं दिखाने का मौका नहीं मिला, उसने अपने स्तर पर सम्मेलन बुला लिए।
ताकत का तकाजा प्रतिष्ठा का प्रश्न
1. प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट
पायलट पर पूरे प्रदेश के संगठन की जिम्मेदारी है। इसीलिए संभागीय संकल्प रैली, राहुल गांधी के जयपुर में रोड-शो, डूंगरपुर जिले में संकल्प रैली की तरह हर अहम सभा-रैली में भीड़ जुटाने के लिए सक्रिय रहे हैं। लेकिन अपने निर्वाचन सम्भाग अजमेर की संकल्प रैली में विशेष रुचि ली। सम्भाग के लोगों की प्रदेश कार्यालय में बैठक ली, रैली से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए रणनीति बनाई। रैली में भीड़ जुटाने के लिए लक्ष्य बांटे। पीसीसी से भी पदाधिकारियों को रैली की निगरानी के लिए लगाया। अमजेर के बाद करौली रैली में भी लगातार मॉनिटरिंग की। रैली में भीड़ भी जुटी, जिसमें खुद नेता ही लम्बे जाम में फंस गए।
2. राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत
गहलोत को संगठन में राष्ट्र स्तर पर काम करने का मौका मिला है लेकिन मारवाड़ गृह सम्भाग जोधपुर में हर आयोजन को लेकर पूरी तरह सक्रिय रहे हैं। अब तक हर कार्यक्रम में शामिल हुए, संकल्प रैली में भी पूरी सक्रियता दिखाई। रैली के लिए 2-3 दिन जोधपुर में डेरा जमाए रखा। क्षेत्र के लोगों से लगातार सम्पर्क किया, रैली में भीड़ जुटाने की रणनीति बनाई।
3. नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी
डूडी बीकानेर संभाग से हैं लेकिन इस संभाग की रैली चूरू जिले में रखी गई इसलिए डूडी की विशेष भूमिका नहीं रही। रैली की कमान क्षेत्रीय नेताओं ने संभाली। लेकिन अब डूडी की प्रतिष्ठा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा को यादगार बनाने से जुड़ी है। राहुल की 10 अक्टूबर को बीकानेर में सभा होगी। इसमें लोगों को लाने के लिए डूडी घर-घर पीले चावल बंटवा रहे हैं।
4. पूर्व मंत्री सीपी जोशी
जोशी मेंवाड़ से निकलकर संगठन में राष्ट्र स्तर पर मजबूत हुए जोशी फिलहाल हाशिए पर हैं। संगठन में उनके पास कोई पद नहीं है। लम्बे समय तक प्रदेश से दूर रहे जोशी महीनेभर से प्रदेश में सक्रिय नजर आ रहे हैं। हर कार्यक्रम में उपस्थिति तो दे ही रहे हैं, गृह संभाग उदयपुर सहित प्रदेश में पुन: वजूद दिखाने के लिए रविवार को किसान सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में नेताओं ने किसानों को लाने के लिए ताकत झोंक दी। सम्मेलन राजसमंद जिले के चारभुजा में मौराणा चौराहे पर हुआ। इसमें पायलट, गहलोत, डूडी, अविनाश पाण्डे आदि नेता पहुंचे। डॉ. जोशी ने भी यहां किसानों के बीच सक्रियता दिखाई।
5. राष्ट्रीय सचिव जितेन्द्र सिंह
जितेन्द्र ने फिलहाल किसी बड़े कार्यक्रम की कमान नहीं संभाली लेकिन दिल्ली के बाद अपने गृह जिले अलवर में पूरी तरह सक्रिय हैं। राज्य में चुनावी सभाओं-रैलियों में मंच साझा कर रहे हैं।





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