मौसम वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मणसिंह राठौड़ ने कहा...
तटस्थता त्यागें, सक्रिय रहें वरिष्ठ नागरिक
जालोर. भारत जब उत्कर्ष पर रहा तब समाज के प्रबंधन की व्यवस्था बुजुर्गों के हाथ में रही। वे देश की दशा और दिशा निर्धारित करते रहे। अब वरिष्ठ नागरिक तटस्थ नहीं रह सकते। आप जब एक होकर आवाज लगाएंगे तो राष्टï्र आपकी बात सुनेगा।
यह बात संयुक्त राष्ट्रसंघ के मौसम प्रकल्पों के अध्यक्ष और विश्व बैंक के सलाहकार वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मणसिंह राठौड़ ने सीनियर सिटीजन पार्कमें वरिष्ठ नागरिक दिवस पर सोमवार को आयोजित समारोह में कही। उन्होंने कहा दुर्जन व्यक्ति की दुर्जनता के बजाय सज्जन की निष्क्रियता से अधिक नुकसान होता है।सज्जन को अन्याय के खिलाफ बोलना चाहिए और पुरजोर बोलना चाहिए।
आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के नाते जिला कलेक्टर बीएल कोठारी ने कहा कि सेवानिवृति के बाद का समय वरिष्ठ नागरिक जनसेवा में लगाएं। उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों से कहा कि पेंशन व चिकित्सा सम्बन्धी किसी भी प्रकार की कोई समस्या होतो वे नि:संकोच ध्यान में लाये उनका यथा संभव निराकरण किया जायेगा। इससे पूर्व अधिवक्ता ईश्वर मेहता, उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्र सिंह सिसोदिया एवं हरियाणा सरकार के सिंचाईअधिकारी आरपी शर्मा ने भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर विचार व्यक्त किए वही इंजीनियर हजारीमल सुथार ने अध्यक्षीय सम्बोधन किया।
संयोजक बीएल सुथार ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताई, वही जालोर विकास समिति के सचिव मोहन पाराशर ने समिति द्वारा करवाए गए कार्यों की जानकारी दी।सीनियर सिटीजन पार्क के संरक्षक लक्ष्मण सुंदेशा ने आभार जताया। संचालन कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रदेश नेता ईश्वरलाल शर्मा एवं अधिवक्ता देवकीनन्दन व्यास ने किया। इस अवसर पर सैकड़ों की तादाद में विभिन्न क्षेत्रों के सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारी, उद्यमी, व्यवसायी, राजनेता एवं वरिष्ठ नागरिक मौजूद थे।
ऐलाना में किया राठौड़ का स्वागत
रविवार शाम को ऐलाना में एक सामाजिक समारोह में वैज्ञानिक एवं भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. लक्ष्मणसिंह राठौड़ का स्वागत किया गया। आयोजक चुण्डावतसिंह बालावत ने बताया कि यहां उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्रसिंह सिसोदिया, लक्ष्मणसिंह बालावत, मगेजसिंह भाटी, गणपतसिंह बालावत, राजूसिंह बाकरा, श्रवणसिंह राठौड़ दासपां, कृषि सुपरवाइजर महेश शर्मा आदि ने डॉ. राठौड़ का अभिनंदन किया।
राठौड़ ने बुजुर्गों को दी अनुभवों की सीख
- मौसम सभी को प्रभावित करता है।ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो मौसम से प्रभावित नहीं होती। जब व्यक्ति, वनस्पति या जीव उम्रदराज हो जाता हैतो उस वक्त उसे खुद को सभी प्रकार के मौसम, चाहे वह परिवार का हो अथवा वायुमण्डल का हो। उसी अनुरूप उन्हें जीवनशैली ढालनी चाहिए।
- सूर्यास्त से पूर्व भोजन के नियम को निभाएं।
- ऋतुपरक भोजन करें और स्थानपरक सामग्री का ही सेवन करें। जिस जलवायु और मिट्टी में हम पैदा हुए, उसी जलवायु और मिट्टी में उत्पन्न भोजन हमें पुष्ट करता है।
- साथ मिलकर बैठें और नियमित रचनात्मक कार्यकरते रहें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रस्फुटन होता रहे।
- हमें अपने आपको बदलाव के लिए तैयार करना चाहिए। हम सेवानिवृत्त हैं, हमें किसी का खौफ नहीं है। समाज में जहां भी कुछगलत हो रहा है। वहां हमें आवाज उठानी चाहिए और हमारी आवाज में दम है।
- तीन पीढिय़ों के बीच संवाद में कमी आईहै और उसे सभी भुगत रहे हैं। इस संवाद को जारी रखने और सुधार के क्रम में खुद को ढालने की जरूरत है। बजुर्ग पहल करें और हालात सुधारें।
- समाज आजकल बहुत तेजी से बंट रहा है। धार्मिक, क्षेत्रीय और जातीय बंटवारा देश के लिए बहुत घातक है। हमें इसके लिए खिलाफ खुलकर बोलना चाहिए। हैरत है कि हम खुद बच्चों में यह जहर भर रहे हैं। इस पर रोक लगाना हमारा दायित्व है।
- हमारी न्यायपालिका भी यदि चूक करे तो हमें उसके खिलाफ भी बोलना चाहिए। यदि समाज में क्षरण करने जैसे निर्णय है तो फिर बात की जानी चाहिए। सीनियर सिटीजन अपना विरोध दर्शाएं। न्यायालय की अवहेलना और अनादर नहीं करे परन्तु अपनी भावना व्यक्त करनी चाहिए।
- चुनावी माहौल में वोटों के लिए किसी तरह का उन्माद नहीं फैलने दें। यह भी हमारी जिम्मेदारी।





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