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बिल्ंिडग बायलॉज की मंजूरी पर नहीं हो पाया फैसला, आज से रुक जाएगा माउंट आबू

माउंट आबू . आबू संघर्ष समिति बिल्ंिडग बायलॉज की स्वीकृति को लेकर बुधवार से माउंट आबू बंद को लेकर अडिग है क्योंकि सरकार और प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। समिति अध्यक्ष सुनील आचार्य ने बताया कि बंद तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। जनता एकराय होकर बंद का समर्थन कर रही है। शहरी क्षेत्र से लेकर देलवाड़ा, अचलगढ़, ओरिया, सालगांव, गुरुशिखर समेत सभी क्षेत्रों में बंद रहेगा। इस अवसर पर किचन गार्डन पार्किंग में जनसभा होगी। इससे पूर्व शहर में मौन जलूस निकाला जाएगा।
उधर, बंद के आह्वान को देखते हुए पुलिस उप अधीक्षक हीरालाल की अध्यक्षता में मंगलवार को थाना परिसर में सीएलजी की बैठक हुई। बैठक में बताया कि पर्यटकों की सुविधा के लिए तलहटी पर ही बंद के बैनर लगाए जाएंगे। कुछ लोगों को तलहटी पर तैनात भी किया जाएगा।

खण्डहर में तब्दील हुई इमारतें
समिति अध्यक्ष आचार्य ने कहा कि बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृत न होने से लोगों को जर्जर मकानों में रहने को विवश होना पड़ रहा है। इमारतें खण्डहर हो रही हैं। पिछले ढाई दशक से भी अधिक समय से विभिन्न स्तर पर निर्माण प्रतिबंध का दंश बाशिंदे झेल रहे हैं। राज्य सरकार ने बिल्डिंग बायलॉज बनाने को समिति गठित की हुई है। उसने यहां की भौगोलिक स्थिति, जलवायु, जनता की आवश्यकता, वस्तुस्थिति का बारीकी से अध्ययन कर बायलॉज तैयार किए और सक्षम स्वीकृति को भेजे लेकिन आज तक मंजूरी की राह जोह रहे हैं। स्थिति यह है कि बाथरूम, सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में स्वीकृति के अभाव में मरम्मत नहीं कर पा रहे हैं। इसे देखते हुए आबू बंद का निर्णय करना पड़ा।

अधिकारों से वंचित हैं लोग
राजपूत करणी सेना के भारत सिंह राठौड़ ने कहा कि यह बंद स्वैच्छिक है और शांतिपूर्वक रहेगा। इसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी संगठनों ने स्वीकृति दी है। प्रशांत राका व रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष रूपेश जैन ने कहा कि जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है। पूर्व पार्षद भंवर सिंह मेड़तिया ने कहा कि मास्टर प्लान में प्रावधान है कि बायलॉज बनने तक भवनों की मरम्मत, नवीनीकरण की स्वीकृति मॉनिटरिंग कमेटी देगी लेकिन कमेटी ने निर्माण सामग्री परिवहन पर ही प्रतिबंध लगा दिया है। इससे मूलभूत अधिकारों वंचित किया जा रहा है।

चल रही है प्रक्रिया
पालिका उपाध्यक्ष अर्चना दवे ने कहा कि बिल्डिंग बायलॉज स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है जिसके लिए पालिका अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक जयपुर गए हैं। वे अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही सरकार की ओर से घोषणा की जाएगी। इस पर प्रवीण सिंह परमार ने कहा कि समिति ने आठ महीने पहले ही बायलॉज स्वीकृति के लिए भेजे थे आज तक कार्यवाही नहीं होने से लोगों में रोष है। बंद का आह्वान मजबूरी में किया गया है।

कोरे आश्वासन से रोष
महेंद्र ङ्क्षसह परमार ने बताया कि सरकार की ओर से इस संदर्भ में हर बार आश्वासन दिए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत से सभी वाकिफ हैं। अंतिम हथियार के तौर पर बंद का आह्वान किया है, सरकार गौरव यात्रा में व्यस्त है फिर चुनावों में व्यस्त हो जाएगी। माउंट आबू की किसी को चिंता नहीं है। यदि सरकार बदल गई तो फिर बायलॉज को लेकर शून्य से कार्य करना पड़ेगा। पिछले 30-32 साल से वे देख रहे हैं। कई सरकार आई और चली गईं। हर बार नई सरकार में बायलॉज को नए सिरे से बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई। इस कारण आज तक स्वीकृति नहीं मिल पाई।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार
इस अवसर पर संजय विश्राम, ललित विश्नोई, प्रमोद व्यास, मुराद मोहम्मद खान, ललित कालमा, गणपत ङ्क्षसह, हजारीमल परिहार, इकबाल खान, नीरव गुजराल, सीताराम माली, शैलङ्क्षसह, शैतान सिंह, दीपक त्रिपाठी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

दहशत में जी रहे हैं लोग
संवेदनशील क्षेत्र माउंट आबू में बार-बार भूकंप आने व गत वर्षों में भारी बारिश से मकानोंं की स्थिति बहुत बिगड़ चुकी है। कई भवन जानमाल के नुकसान को न्योता दे रहे हैं। मरम्मत की स्वीकृति न मिलने से लोग दहशत में निवास कर रहे हैं।

कानून का पूर्णत: सम्मान हो
पुलिस उप अधीक्षक ने कहा कि बंद में किसी तरह की जोर जबरदस्ती न हो, कानून का पूर्णत: सम्मान करना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी संयमित प्रचार किया जाए। किसी की गरिमा को ठेस पहुचंाने वाली टिप्पणी नहीं की जाए। थाना अधिकारी अचल सिंह देवड़ा ने पूछा कि पर्यटकों को बंद की जानकारी के लिए क्या व्यवस्था की गई है? इस पर बताया कि पहले ही व्यापक स्तर पर प्रचार किया गया है। फिर भी आने वाले पर्यटकों को परेशानी न हो उसके लिए तलहटी पर पुख्ता व्यवस्था की है। होटल एसोसिएशन अध्यक्ष कश्यप जानी ने बताया कि बंद का समर्थन कर रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग करने वालों को बंद की जानकारी दी गई है ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।

करिश्मा नहीं कर पाई मॉनिटरिंग कमेटी
भवन निर्माण संबंधी समस्याओं के निस्तारण के लिए ईएसजेड लागू होने के बाद 14 फरवरी 2009 को मॉनिटरिंग कमेटी का गठन हुआ। 16 फरवरी 2010 को मॉनिटरिंग कमेटी की पहली बैठक हुई। इसमें कार्यक्षेत्र पर चर्चा के बाद ईएसजेड अधिसूचना में वर्णित निर्देशों के अनुरूप पालिका, ग्राम पंचायत क्षेत्र में भवनों की मरम्मत, नवीनीकरण, नए निर्माणों के संदर्भ में प्राप्त आवेदनों की जांच, स्वीकृति योग्य प्रकरण प्रस्तुत करने आदि के लिए हर दो महीने में बैठक का निर्णय किया था। 2014 में दो कार्यकाल पूरे होने पर 5 मई 2015 को दो वर्ष के लिए पुन: बनी मॉनिटरिंग कमेटी से आशा थी लेकिन कुछ नहीं हो पाया। 28 अप्रेल 2017 को अंतिम सहित कुल आठ बैठकें हुईं। हाल ही, चौथी बार कमेटी का गठन हुआ है।

इनका कहना है

गत वर्षों में क्षेत्र में अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों से लेकर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए बिल्डिंग बायलाज को शीघ्र स्वीकृत करना चाहिए।
-त्रिलोक जानी, होटल उद्यमी, माउंट आबू

रोटी, कपड़ा व मकान मूलभूत संवैधानिक अधिकार हंै इसलिए पुराने भवनों की मरम्मत, नवीनीकरण, परिवर्तन की स्वीकृति जरूरी है।
- ईश्वर चंद डागा, माउंट आबू

क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भवन जर्जर अवस्था में हैं। कई भवनों को तोड़कर बनाने की जरूरत है। कभी भी क्षतिग्रस्त होने वाले भवनों से जानमाल का खतरा है।
- देवी सिंह देवल, माउंट आबू



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