हिण्डौनसिटी. सीजन के दौर बाजरे की बम्पर आवक से आबाद रहने वाली जिले की एक मात्र ‘ए ’ श्रेणी की कृषि उपज मंडी में इन दिनों कम आवक होने से सुस्ती का माहौल है। विगत वर्षों की अपेक्षा इस बार मंडी में महज 30 से 40 फीसदी बाजरे की आवक हो रही है। इससे किसानों को तो नुकसान उठाना ही पड़ा है, लेकिन अब इसका सीधा असर मंडी कोष के अलावा व्यापारियों व पल्लेदारों पर भी पड़ रहा है। आलम यह है कि बीते करीब 15 दिन में बाजरे मंडी में महज ३० हजार क्विंटल बाजरे की आवक हो पाई है। जिससे मंडी को मामूली सी आय हो सकी है।
मंडी सूत्रों के अनुसार इस साल बाजरे की फसल में फडक़ा कीड़ा लगने तथा इसके बाद बारिश होने से काफी खराबा हुआ। जिससे बाजरा बदरंग होने के साथ ही खराब हो गया। किसानों की मानें तो पिछले वर्ष बाजरे की पैदावार प्रति हेेक्टेयर पांच से छह क्विन्टल हुई थी। लेकिन इस बार एक हेक्टेयर भूमि में महज एक से डेढ़ क्विन्टल बाजरा हुआ है। इधर व्यापारियों ने बताया कि फसल खराबे के कारण इस बार मंडी में प्रतिदिन महज दो से तीन हजार बोरी बाजरे की आवक हो रही है। जबकि पिछले वर्ष इन दिनों प्रतिदिन आठ से १० हजार बोरी बाजरे की आवक हुई थी। बाजरे की कम आवक होने से मंडी कोष में मात्र १० से १२ हजार रुपए प्रतिदिन की आवक हो रही है। जबकि विगत वर्षो में आय का आंकड़ा प्रतिदिन 30 से 40हजार रुपए हुआ करता था।
सीजन के दौर में मंदी के चलते पल्लेदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि प्रतिदिन छह सौ से आठ सौ रुपए कमाने वाले पल्लेदारों को 300 से 350 रुपए तक का रोजगार मिल पा रहा है।
इनका कहना है।
बारिश के कारण फसल में हुए नुकसान से बाजरे की आवक में काफी हद तक कमी आई है। इससे व्यापारियों समेत मंडी कोष व पल्लेदारों को भारी नुकसान हुआ है।- विशम्भर बंडी भोला, अध्यक्ष कृषि उपज मंडी व्यापार संघ, हिण्डौनसिटी।





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