नई दिल्ली। बहुत कम समय में राहुल गांधी की नजर में आई और कांग्रेस आईटी सेल का मेकओवर करने वाली दिव्या स्पदंना का रुतबा अब पार्टी में कम होने लगा है। पीएम मोदी पर बचकाने ट्वीट को लेकर भी पार्टी के नेता उनसे नाराज हैं। यही कारण है कि कुछ दिनों पहले उनके इस्तीफे की चर्चा भी खुलकर सामने आई थी। जिसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश जब से कोर कमेटी का संयोजक बने हैं उनकी सिरदर्दी बढ़ गई है। दूसरी तरफ ये भी बताया जा रहा है कि स्पंदना को पार्टी के प्रचार में भी लगाया जा सकता है।
अति सक्रियता पड़ी भारी
स्पंदना को शुरुआत में जब सोशल मीडिया की जिम्मेदारी मिली तो राहुल गांधी का ट्विटर हैंडल, फेसबुक पेज, इंस्ट्राग्राम और कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल inc india को देखना भी उन्हीं के हवाले किया गया। उनकी सक्रियता से पार्टी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक्सपोजर तो मिला लेकिन कुछ मामलों पार्टी की किरकिरी होने से कई वरिष्ठ नेता अब उनसे कन्नी काटने लगे हैं। फिलहाल मामला यहीं पर अटका है। लेकिन जयराम का सीधा दखल जरूर दिव्या को सिरदर्द दे रहा है। दिव्या की ओर से राहुल के करीबी होने का दावा करना भी कांग्रेसियों को रास नहीं आया। 2004 के वक्त पार्टी का वॉर रूम संभालने वाले जयराम खुद राहुल से सीधे मैंडेट लेकर काम कर रहे हैं, ऐसे में दिव्या पर दबाव बढ़ना लाजमी है।
मोदी को लेकर जारी ट्वीट ने खड़ी की मुश्किल
दिव्या की ओर से पीएम मोदी को टाइटैनिक जैसे पोज में दिखाने वाले जैसे कुछ ऐसे ट्वीट आए। इस तरह के ट्वीट को लेकर पार्टी के ट्विटर हैंडल पर चली सवालों की सीरीज में ही नेहरू पर सवाल उठ गए, तो पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ा। इसी तरह राखी सावंत का नाम लेकर मोदी पर कटाक्ष करने वाला ट्वीट भी दिव्या के खिलाफ ही गया। हालांकि दिव्या ने कई बेहतर ट्वीट और सोशल मीडिया पर पार्टी को मजबूत करने का काम तो किया, लेकिन गाहे बगाहे कुछ बचकाने ट्वीट भी कर डाले, जिससे सवालों के घेरे में आने की वजह से उनका कद घट गया।
जयराम ने बढ़ाया दखल
हाल ही में पार्टी कोर कमेटी के संयोजक बनाए गए जयराम रमेश ने जिम्मा संभालते ही हर विभाग को कॉर्डिनेट करना शुरू कर दिया। कई मौकों पर जयराम ने पार्टी के टि्वटर हैंडल से कोई वीडियो ट्वीट करने या कुछ अचानक लिखने को कहा तो दिव्या उपलब्ध नहीं रहीं, तो उनके असिस्टेंट चिराग ने ऐसा करने से ये कहकर मना कर दिया कि बिना दिव्या से पूछे वो नहीं कर सकते। इसके अलावा जयराम ने पार्टी हित में अपना दखल बढ़ा दिया। जयराम कांग्रेस के वार रूम 15 गुरुद्वारा रकाबगंज का भी कॉर्डिनेशन देख रहे हैं। वे अमूमन रोज वहां होते हैं और जरुरत पड़ने पर पार्टी हित में निर्देश देते हैं। वो चाहते हैं कि उस पर फौरन अमल हो। यही कारण है कि दिव्या कम वक्त के लिए दिल्ली रहती हैं। जयराम के बढ़ते दखल से दिव्या का असहज होना लाजमी ही था।
पार्टी नेताओं को नहीं आईं रास
कांग्रेस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिव्या ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग क्षेत्र में पार्टी की राय बनाने के लिए कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए। लेकिन नेताओं का उनका कई चीजों पर निर्देशित करना रास नहीं आया। आनन्द शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और आरपीएन सिंह सरीखे वरिष्ठ नेताओं ने खुद ही ऐसे ग्रुप छोड़ दिए। इन नेताओं को दिव्या का निर्देशित करना भी रास नहीं आया। दरअसल, दिव्या जब सोशल मीडिया की प्रमुख बनीं तो उनको लगा कि इस विभाग पर उनकी ही चलेगी। लेकिन पहले ट्विटर, फिर नेताओं की बेरुखी और कुछ दिव्या के ट्वीट ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं, जिससे उनकी भूमिका सीमित हो गई है।





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