सीकर. मरते समय तो आपने किसी शख्स को रामायण सुनाने के वाकये खूब देखे- सुने होंगे। लेकिन, क्या कभी मरने के बाद प्र्रेत आत्माओं को रामायण सुनाने की बात सुनी है? शायद नहीं! लेकिन, सीकर में एक ऐसा शख्स भी है जो यह काम पिछले ढाई साल से लगातार कर रहा है। वो भी किसी घर या मंदिर में बैठकर नहीं, बल्कि श्मशान घाट में। आपको शायद यकीन ना हो लेकिन रामलीला मैदान के पीछे स्थित शिवधाम धर्माणा में इसकी तस्दीक कभी भी की जा सकती है। जहां शिवधाम धर्माणा ट्रस्ट के कैलाश तिवाड़ी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए इस दिनचर्या को लगातार निभा रहे हैं।
आत्माओं के लिए बिछता है आसन
कैलाश तिवाड़ी प्रेतआत्माओं को तुलसीदास रामायण का रोजाना एक अध्याय गाकर सुनाते हैं। रामायण के यह पाठ श्मशान स्थित महाकाली मंदिर में किया जाता है। जहां पाठ से पहले मृत आत्माओं के लिए एक दरी बिछाई जाती है। फिर वहां ज्ञात- अज्ञात प्रेत आत्माओं को बुलाने के लिए उनका आह्वान किया जाता है। इसके बाद तिवाड़ी अपने रामायण का अध्याय पूरा करते हैं और अगले दिन फिर से आने की बात कहते हुए उन्हें विदा भी करते हैँं। बकौल तिवाड़ी आत्माओं के आह्वान पर वह कई बार उनकी उपस्थिति महसूस भी कर चुके हैं।
मोक्ष के लिए करते हैं तर्पण
कैलाश तिवाड़ी के मुताबिक रामायण के पाठ वह अतृप्त आत्माओं की मुक्ति और मोक्ष के लिए करते हैं। इसके लिए वह श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को विशेष तर्पण कार्यक्रम भी रखते हैं। जिसमें वह आत्माओं के मोक्ष के लिए तर्पण पूजन के साथ करीब 250 ब्राह्मणों और गरीबों के लिए भोज भी आयोजित करते हैं। इस बार यह कार्यक्रम 9 अक्टूबर को होगा।
धर्माणा में तैरेंगी मछलिया, बतखों का होगा विहार
एक बगीचे के रूप में विकसित हो चुके शिवधाम धर्माणा को अब एक पब्लिक पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए धर्माणा में जल्द ही पौंड में आकर्षक मछलियां तैरती दिखेगी, तो वहीं, बतखों के विहार के साथ रंग- बिरंगे पंछियों की चहचहाट भी होगी। इसके लिए मछलियों का पौंड बनकर तैयार हो चुका है। बकौल कैलाश तिवाड़ी जल्द ही उसके लिए मछलियों की खरीद की जाएगी। वहीं, धर्माणा बगीची को पब्लिक पार्क के रूप में विकसित करने की अन्य तैयारियां भी जोरों पर है।





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